संगम तट पर स्थित अरेल (वर्तमान में अरैल) सिर्फ तराई का मैदान ही नहीं, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का गवाह है। राजाओं, आध्यात्मिक गुरुओं और दार्शनिकों का यहां ठिकाना रहा। मुगल बादशाह हुमायूं जब शेरशाह सूरी की सेना से परास्त होकर भाग रहा था तो इसी तट पर उसे पनाह मिली थी। कुंभ मेला में आने वाले श्रद्धालु इस क्षेत्र में कल्पवास कर पूजा-पाठ तो करते हैं। लेकिन शायद उन्हें मालूम हो कि इस तट को आदि वेनीमाधव का आशीर्वाद प्राप्त है। यह तीर्थ स्थल रहा है।इलाहाबाद विश्वविद्यालय के…
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