लेखक गाँव: हिमालय में साहित्य, संस्कृति और वैश्विक संवाद का संगम

— डॉ. सत्यवान सौरभ — डॉ. प्रियंका सौरभ हिमालय केवल पर्वतों की शृंखला नहीं है; वह भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा, प्राकृतिक संपदा और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत प्रतीक है। इसकी ऊँची चोटियाँ मनुष्य को बड़े सपने देखने की प्रेरणा देती हैं, जबकि इसकी नदियाँ जीवन, निरंतरता और सभ्यताओं के विकास का संदेश देती हैं। इसी हिमालयी चेतना को साहित्य, कला, संस्कृति और वैश्विक संवाद से जोड़ने वाला तृतीय अंतरराष्ट्रीय ‘स्पर्श पर हिमालय’ 2026 महोत्सव उत्तराखंड के देहरादून स्थित लेखक गाँव, थानो में सहभागिता का यादगार अवसर बना। इस…

Loading

Read More

जयंती पर विशेष “भारत के जिल्दसाज”

डॉ. विवेकानंद उपाध्याय वरिष्ठ स्तंभकार, (देवरिया) इतिहास में कुछ व्यक्तित्व तिथि नहीं, दृष्टि बन जाते हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल ऐसे ही दृष्टि-पुरुष हैं। उन्हें केवल स्वतंत्रता सेनानी कहना, सागर को केवल पानी कहना है। वे भारत नामक महाग्रंथ के जिल्दसाज हैं, जिसने बिखरे पन्नों को एक सूत्र में पिरोकर ऐसा मजबूत ग्रंथ बनाया, जिसके पन्ने आज भी फटते नहीं हैं। 31 अक्टूबर, 1875 को नडियाद में जन्मा वह बालक भारत की एकता का पर्याय बनेगा, यह नियति ने तय कर रखा था। साहित्यिक रूपक में भारत की स्वतंत्रता एक महाकाव्य…

Loading

Read More

पुस्तक समीक्षा भीड़ में अकेलेपन का सच ‘एकांत’

डॉ. विवेकानंद उपाध्याय वरिष्ठ स्तंभकार, (देवरिया) आज के दौर में जब कहानियों में चमत्कार और सनसनी ज्यादा बिकती है, तब ‘एकांत’ जैसी किताब सुकून देती है। यह किताब शोर नहीं करती, धीरे से कंधे पर हाथ रखती है। डॉ. मधुछंदा चक्रवर्ती का यह संग्रह उसी भीड़ में अकेले पड़ गए इंसान की कहानी कहता है, जिसे हम रोज देखते हैं पर पहचान नहीं पाते। डॉ. मधुछंदा चक्रवर्ती की किताब ‘एकांत’ आज के हिंदी साहित्य में मानवीय संवेदनाओं और समाज की सच्चाई को बहुत करीब से दिखाती है। यह सिर्फ कहानियों…

Loading

Read More

मानवता की वारिस: पूजा शर्मा

बिमला कुमारी गुप्ता वरिष्ठ लेखिका, हैदराबाद आजकल जब भी हम मोबाइल फोन उठाते हैं, तो सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाते अनगिनत वीडियो और QR कोड दिखाई देते हैं। हाल ही में मेरे सामने भी एक ऐसा ही वीडियो आया, जिसमें लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता और दान की अपील की गई थी। आज के दौर में ऑनलाइन फ्रॉड और धोखाधड़ी इतनी बढ़ चुकी है कि किसी पर भी आँख मूँदकर भरोसा करना मुश्किल है। एक जागरूक नागरिक होने के नाते, मैंने तुरंत गूगल पर…

Loading

Read More

सोशल मीडिया की ओर मुड़ता क्राइम का बाज़ार: संभलकर करें इस्तेमाल

सुनीता कुमारी पूर्णियां बिहार आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है। इंटरनेट और स्मार्टफोन ने पूरी दुनिया को हमारी हथेली में समेट दिया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, एक्स (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने संवाद को आसान, तेज़ और व्यापक बना दिया है। जहाँ इन माध्यमों ने शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन और सामाजिक जागरूकता को नई दिशा दी है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के लिए भी यह एक नया और आसान बाज़ार बनता जा रहा है। आज अपराध केवल सड़कों या अंधेरी गलियों तक सीमित…

Loading

Read More

सोना गिरा और चमकी चाँदी…!

सोना गिरा, चमकी चाँदी, बाज़ार में कैसी हैरानी, भावों ने फिर ली ‘करवट’, बदली अपनी कहानी। कभी सोना आसमान चढ़े, कभी ज़मीन पर आए, निवेशक की धड़कन बढ़े, जो भाव नए बन जाएँ। चाँदी भी अब कहाँ पीछे,अपनी चमक दिखाती है, कल तक जो थी शांत पड़ी, आज रफ्तार लाती है। दुकानों में गहनों की बातें, जेबों में हिसाब लगाया, खरीदारी से पूर्व हरेक, आज भावों को देख आया। किस्मत भी बाज़ार जैसी, कब क्या? ‘रंग’ दिखाए, आज जो महँगा लगता है, कल वो सस्ता कहलाए। सोना हो या चाँदी…

Loading

Read More

बूथ कैप्चरिंग से एसआईआर तक : लोकतंत्र की शुद्धिकरण यात्रा

डॉ. राघवेन्द्र शर्मा एक समय था जब लोकसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में दिल दहला देने वाली सियासी खबरें समाचार पत्रों के प्रथम पृष्ठ पर सुर्खियां बनी रहती थीं। उदाहरण – फलां राज्य में बूथ कैप्चरिंग हो गई। लोकतंत्र के लुटेरों द्वारा मतदान कार्य में लगे कर्मचारियों, अधिकारियों, पोलिंग बूथ एजेंटों और यहां तक की मतदाताओं की सामूहिक हत्याओं के समाचार प्रमुखता लिए रहते थे। कुछ ही मिनटों में फर्जी मत पत्रों से भरी हुई पेटियों को मतदान केंद्रों में रखकर, असली मत पेटियों और मतपत्रों को…

Loading

Read More

अनवरत राष्ट्रसेवा का कीर्तिमान गढ़ते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

सुरेश पचौरी यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 7 अक्टूबर 2026 को अपनी अनवरत राष्ट्र सेवा का कीर्तिमान गढ़ने जा रहे हैं। यह वह ऐतिहासिक दिन होगा, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री और तत्पश्चात देश के प्रधानमंत्री के रूप में 7 अक्टूबर 2026 को अपनी राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण करेंगे। यह भारत के राजनीतिक परिदृश्य में नया रिकॉर्ड होगा। उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में तथा 26 मई 2014 को देश के प्रधानमंत्री के रूप में दायित्व संभाला था। मोदी के दौर में गुजरात…

Loading

Read More

बच्चों की काला बाजारी का फलता-फूलता कारोबार, पंजाब भी अछूता नहीं

सुभाष आनंद बच्चों की तस्करी और काला बाजारी का धंधा वैश्विक रूप ले चुका है। चिंता की बात यह है कि भारत में भी यह कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है और अब पंजाब भी इससे अछूता नहीं रहा। पंजाब सरकार के आंकड़े स्थिति की गंभीरता बताते हैं। पिछले 4 वर्षों में राज्य से 1082 बच्चे लापता हुए, जिनमें से पुलिस केवल 402 बच्चों को ही ढूंढ पाई। शेष 680 बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला। आशंका है कि ये बच्चे संगठित अपराध के जाल में फंस चुके…

Loading

Read More

व्यंग्य सपना पूरा करने का सपना

सुधाकर आशावादी सपने यदि खुली आँखों से देखे जाएँ तो सपने नही कहलाते, केवल बुनी जाने वाली कल्पनाएँ कहलाते हैं। सपने वे होते हैं , जो वास्तविक प्रतीत तो होते हैं, किंतु जिनका यथार्थ से कोई संबंध नहीं होता,फिर भी सपनों को हकीकत से जोड़ने वाले लोग सत्यवादी महाराजा हरिश्चंद्र जी का उदाहरण प्रस्तुत करके यह कहते हैं, कि सपनों को भी यथार्थ सत्य मानकर उनके अनुरूप व्यवहार करना चाहिए। उस सपने में कितनी सच्चाई थी, यह तो कोई नहीं जानता और आज भी स्थिति में भी कोई खास परिवर्तन…

Loading

Read More