लखनऊ मंडल के ऐशबाग कॉलोनी में डोर-टू-डोर जागरूकता अभियान चलाकर साथ कूड़े को अलग-अलग रंगों के डस्टबिन में निस्तारित करने की जानकारी दी गई साथ ही रेलवे कर्मचारियों को सिंगल यूज प्लास्टिक से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान एवं बीमारियों के बारे में भी जानकारी दी गई। इस दौरान कर्मचारियों एवं कॉलोनी वासियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के बारे में बताया गया। आसपास के स्थानों को स्वच्छ रखने का आग्रह किया गया। स्टेशन के वेडिंग क्षेत्रों में कपड़े के थैलों के उपयोग को बढ़ावा देने के संबंध में यात्रियों एवं वेंडरों को जागरूक किया गया। रेलवे स्टेशनों पर स्थापित बॉटल क्रशर मशीनों के संबंध में यात्रियों को जानकारी दी गई तथा इनके उपयोग हेतु जागरूक किया गया।
स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान के अन्तर्गत वाराणसी मंडल के रेलवे कॉलोनियों में डोर-टू-डोर स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान रेलकिर्मियांे एवं उनके परिवारजनों को विभिन्न प्रकार के डस्टबिन के प्रयोग के बारे में बताया गया। स्टेशनों पर यात्रियों को बोतल क्रशर मशीन के प्रयोग तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के थैलों के स्थान पर कपड़े के थैलों के प्रयोग हेतु प्रोत्साहित किया गया। पर्यवेक्षकों द्वारा फूट स्टॉल पर स्वच्छता की जांच की गई। कर्मचारियों एवं कालोनीवासियों को बायो कपोस्टर मशीन के माध्यम से जैविक कचरे के उचित निस्तारण एवं जैविक कचरे से खाद बनने के संबंध में जागरूकता अभियान चलाकर इसके उपयोग के बारे मे जानकारी दी गई। सोशल मीडिया, समाचार पत्रों एवं बैनर, पोस्टर के माध्यम से बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान से सम्बन्धित प्रचार-प्रसार किया गया।
इज्जतनगर मंडल पर स्वच्छता ही सेवा-2026 के अंतर्गत स्वच्छता, जन-जागरूकता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में लालकुआं रेलवे स्टेशन पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यात्रियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों के बारें में जानकारी दी गई। कर्मचारियों एवं यात्रियों को हरा, नीला, लाल एवं काला डस्टबिन के उपयोग के बारे में जागरूक किया गया। इसके साथ ही, रेलवे कॉलोनियों और स्टेशनों पर “अब दो नहीं, चार” के संदेश के साथ कचरा पृथक्कीकरण पर जोर दिया गया। सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े के थैलों के उपयोग हेतु प्रोत्साहित किया गया और अनुपयोगी वस्तुओं के पुनः उपयोग व पुनर्चक्रण के लिए जागरूक किया गया।
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