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गंगा घाटों का भी लिया जायजा श्रद्धालुओं को ना हो कोई परेशानी दिया सख्त निर्देश
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रायबरेली। डलमऊ तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत ऐहार में स्थित प्राचीन बालेश्वर धाम ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है यहां श्रावण मास में शिव भक्तों का हूजूम श्रद्धा की बड़ी पटकथा तैयार करता है आज से 500 साल पूर्व के इतिहास से सुसज्जित बाल्हेमऊ में स्थित प्राचीन शिव मंदिर बालेश्वर धाम मे कावड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु कई गैर जनपदों से आकर यहां शिवलिंग में जल चढ़ाते हैं ऐसे में श्रद्धालुओं के भारी हम को देखते हुए शासन प्रशासन की भी जिम्मेदारी बड़े पैमाने पर सुनिश्चित हो जाती है इसके दृष्टिगत बीते दिन शनिवार को जिला अधिकारी सरनीत कौर और पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने मंदिर प्रांगण का अचौक निरीक्षण किया निरीक्षण के दौरान भगवान शिव के दर्शन करते हुए जिला अधिकारी को पुलिस अधीक्षक ने आगामी सावन माह की तैयारी को लेकर जरूरी जानकारी ली और निर्देश दिए की आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े और ना ही मेला प्रांगण में किसी भी प्रकार की अनैतिक गतिविधि हुड़दंग से निपटने के लिए सरकारी अमला पूरी तरीके से तैयार रहे आस्था की राह में किसी भी प्रकार की कोर कसर बाकी नहीं होनी चाहिए इस दौरान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ऐहार राजेश यादव फौजी ने जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को बालेश्वर धाम का चित्र भेंट किया जहां पर बालेश्वर सेवा समिति के सदस्य सचिन देव तिवारी , टेनी बाबा ,समाजसेवी भोलानाथ यादव , राहुल यादव,भूपेंद्र गुप्ता ,राकेश माली आदि ग्रामवासी उपस्थित रहे वही निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के द्वारा डलमऊ गंगा घाट सरेनी गंगा घाट तथा लालगंज गंगा घाट का भी निरीक्षण किया गया और जरूरी दिशा निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए इस दौरान उप जिलाधिकारी डलमऊ प्रीति सिंह व उप जिलाधिकारी लालगंज राजेश श्रीवास्तव, तहसीलदार डलमऊ मंजरी सिंह, तहसीलदार लालगंज शिवम सिंह राठौर, क्षेत्राधिकारी लालगंज सुजीत कुमार राय,खंड विकास अधिकारी डलमऊ रामखेलावन,एडियो पंचायत सहायक डलमऊ आराधना साहू,कोतवाली प्रभारी डलमऊ राघवन सिंह, कोतवाली प्रभारी लालगंज प्रमोद कुमार सिंह, थाना प्रभारी सरेनी रमेश चंद्र यादव व डलमऊ कानून गो राम प्रताप ,लेखपाल नम्रता सिंह ,ग्राम पंचायत अधिकारी सुनील कुमार उपस्थित रहे।
500 साल पुराना बताया जाता है इस प्राचीन मंदिर का इतिहास
करीब 500 वर्ष पुराने इस मंदिर के निर्माण की एक रोचक कथा है। कहा जाता है कि पहले यहां घना जंगल था, जहां ग्रामीण अपने पशुओं को चराने लाते थे एक गाय मालिक की गाय का दूध अचानक कम होने लगा और एक दिन उसने छिपकर देखा कि गाय का दूध जमीन में बने एक छेद में गिर रहा है तब
उसी रात गाय के मालिक को स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए शिवजी ने बताया कि वे उसी स्थान पर विराजमान हैं अगले दिन खुदाई में वहां से एक शिवलिंग मिला और बालेश्वर महादेव का मंदिर बनवाया गया तथा मंदिर की एक विशेषता यह है कि इसके गुम्बद पर लगा त्रिशूल सूर्य की गति के साथ अपनी दिशा बदलता है। महाशिवरात्रि के महीने में यहां श्रद्धालुओं का विशेष आगमन होता है। लोग अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए दर्शन करते हैं। मंदिर के पास एक प्राचीन कुआं भी है, जिससे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
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