हर विधायक को कार मिले, साथ में मिलता भत्ता,
जनता पूछे-“हमको कब?” नेता बोले-“बस सत्ता!”
पचहत्तर हजार “कार” के, पच्चीस हजार सहायक,
गाँव-गाँव अब घूमिए साहब, बन जनसेवा-नायक।
कहते हैं-जनता की सुनना, हर मुश्किल हल करना,
तीन माह में रिपोर्ट बनाना, हरेक वादा पूरा करना।
ये कार नई है, राह पुरानी, जनता फिर भी पैदल है,
साहब की गाड़ी दौड़ रही, गाँव अब भी दलदल है।
किसान कहे-“मेरी सुन लो,” युवा कहे-“रोजगार दो,”
गुरु बोले-“स्कूल सँवारो,” मजूर कहे-“अधिकार दो।”
कार मिले तो ठीक साब, जनता को भी याद रखिए,
सरकारी सुविधा सहित जनता का दुख साथ रखिए।
(संदर्भ-विजय का ऐलान, विधायक को कार, साथ में 75 हज़ार)
संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)
मो. 98260 25986
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