जब इस संबंध में प्रभागीय वन अधिकारी नवीन खंडेलवाल से बात की गई तो उन्होंने जांच कर कार्यवाही की बात कही। ग्रामीणों का कहना है कि मीडियाकर्मियों द्वारा पहले भी कई बार सूचनाएं दी जा चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अगर कोई ग्रामीण अपनी जरूरत के लिए एक भी पेड़ काटता है तो पुलिस और वन विभाग के अधिकारी बिना पैसे लिए उसे नहीं काटने देते। ऐसे में संदना क्षेत्र में सागौन जैसे कीमती पेड़ बिना परमिट कट रहे हैं और वन विभाग को जानकारी नहीं है, यह संदेह पैदा करता है।
फिलहाल वन विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सागौन की लकड़ी को तत्काल जब्त किया जाए।
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