शिकायती प्रार्थनापत्रों को रजिस्टर में दर्ज न किए जाने एवं शिकायतकर्ताओं को रिसीविंग न दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रत्येक प्रार्थनापत्र को रजिस्टर में दर्ज करने तथा शिकायतकर्ता को हस्ताक्षरयुक्त प्राप्ति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। सभागार में शिकायतकर्ताओं के बैठने एवं क्रमवार प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करने की व्यवस्था न होने पर निर्देशित किया गया कि शिकायतकर्ताओं को बैठाने, क्रम से आवेदन लेने एवं एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सम्पूर्ण समाधान दिवस में कुल 154 प्रार्थनापत्र प्राप्त हुए, जिनमें 130 राजस्व, 05 पुलिस, 06 विकास, 02 विद्युत तथा 11 अन्य विभागों से संबंधित थे। इनमें से 08 प्रकरणों का मौके पर ही निस्तारण कराया गया। शेष प्रकरणों का एक सप्ताह में तथा विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 15 दिन में गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करते हुए संबंधित शिकायतकर्ता से दूरभाष पर निस्तारण की पुष्टि कराने के निर्देश दिए गए।
13 अत्यन्त गम्भीर प्रकृति के प्रकरणों की जांच उप जिलाधिकारी द्वारा स्वयं कराकर एक सप्ताह में कृत कार्रवाई से अवगत कराने को कहा गया। साथ ही निस्तारण की गुणवत्ता का स्वयं परीक्षण करने तथा असंतोषजनक निस्तारण पाए जाने पर संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध विधिक एवं दण्डात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
ग्रामसभा अथवा सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध कब्जे से संबंधित शिकायतों की जांच उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदार द्वारा स्वयं करने के निर्देश दिए गए। विशेष परिस्थितियों में नायब तहसीलदार से स्थलीय/अभिलेखीय जांच कराई जा सकती है, परन्तु ऐसे प्रकरणों की जांच नायब तहसीलदार से नीचे के अधिकारी से न कराई जाए। निस्तारण के बाद शिकायतकर्ताओं से वार्ता कर उनकी संतुष्टि सुनिश्चित करने तथा असंतोष की स्थिति में प्रकरण की पुनः जांच कराकर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराने के भी निर्देश दिए गए।
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