डॉ. सत्यवान सौरभ आजकल सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का नज़रिया एक चलन बनता जा रहा है, और यह अच्छा नहीं है। फ़ोन, कैमरा और कैमरा-युक्त स्मार्टफोन होते ही लगभग कोई भी सरकारी स्कूल में जाकर शिक्षकों से सवाल पूछ सकता है, कक्षाओं की तस्वीरें खींच सकता है और कुछ ही मिनटों में पूरी शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी राय बना सकता है। कभी-कभी, यह इरादा नेक होता है। नागरिकों को शिक्षा की गुणवत्ता, सार्वजनिक संस्थानों के कामकाज और बच्चों के भविष्य के बारे में चिंतित होने का पूरा…
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