डॉ. प्रियंका सौरभ जंतर-मंतर लोकतांत्रिक भारत का वह सार्वजनिक मंच है जहाँ नागरिक अपनी बात सरकार और समाज तक पहुँचाने के लिए एकत्र होते हैं। यह स्थान संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक है। लेकिन जब किसी विरोध प्रदर्शन में भाषा की मर्यादा टूट जाती है, गाली-गलौज को प्रतिरोध का औजार बना दिया जाता है और अश्लीलता को साहस का पर्याय बताकर उसका उत्सव मनाया जाने लगता है, तब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा क्या है? क्या लोकतंत्र में विरोध का अर्थ…
![]()
