नए उभरते उत्पादों के लिए नए अवसर
कटहल, बाजरा जैसा मोटा अनाज,सब्जियां,जैविक जड़ी-बूटियां जैसे उत्पाद यूके बाजार में उतर सकेंगे। इससे भारत के किसान फसल विविधीकरण कर पाएंगे और घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव से बच पाएंगे।
मत्स्य क्षेत्र को जबरदस्त बढ़ावा
यह समझौता भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को, खासतौर से आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु जैसे तटीय राज्यों के मत्स्य उद्योग को फायदा पहुंचाएगा। 99 फीसदी झींगा, टूना, मछली का भोजन और चारे जैसे समुद्री उत्पादों पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा। यह शुल्क मौजूदा वक्त में 4.2 फीसदी से 8.5 फीसदी तक है।
नीली अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा फायदा
यूके का 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का समुद्री आयात बाजार भारत की नीली अर्थव्यवस्था को बड़ा मौका देगा।
ब्रांडेड चाय-कॉफी को मिलेगा बढ़ावा
एफटीए से भारत को उच्च-मार्जिन ब्रांडेड उत्पाद जैसे कॉफी,चाय, मसाले और पेय पदार्थों के निर्यात में बड़ा अवसर मिलेगा। अभी भारत यूके को 1.7 फीसदी कॉफी, 5.6 फीसदी चाय और 2.9 फीसदी मसालों का निर्यात करता है। टैरिफ यानी शुल्क खत्म होने पर इनका निर्यात तेजी से बढ़ेगा। यही नहीं,अब भारत की इंस्टेंट कॉफी यूके में जर्मनी और स्पेन जैसे बड़े यूरोपीय ब्रांड्स को टक्कर दे सकेगी।
2030 तक 100 अरब डॉलर कृषि निर्यात लक्ष्य की राह होगी आसान
सरकार का मानना है कि यह समझौता भारतीय कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। निर्यात में यह इजाफा 2030 तक कृषि निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के भारत के बड़े लक्ष्य को भी पूरा करेगी।