पितृपक्ष में देवव्रत भीष्म पितामह को प्रथम अर्पण करना चाहिए – अनामिका चौधरी

प्रयागराज। सनातन धर्म में पितृपक्ष को पितरों की मुक्ति और तृप्ति का सबसे पवित्र समय माना गया है। इस विषय पर पूर्व उपमहापौर एवं प्रांत संयोजक, गंगा विचार मंच, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन श्रीमती अनामिका चौधरी निषाद ने कहा कि पितृपक्ष में अपने पितरों से पहले देवव्रत भीष्म पितामह को प्रथम अर्पण करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार भीष्म पितामह आजीवन ब्रह्मचारी रहे और उन्होंने अपने पिता के सुख के लिए अपना संपूर्ण जीवन और राजसिंहासन तक का त्याग कर दिया था। उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था, फिर भी उन्होंने अपने पितरों के ऋण और वंश की रक्षा के लिए कष्ट सहे। इसलिए पितृपक्ष में उन्हें प्रथम तर्पण देने से सभी पितर प्रसन्न होते हैं।

शास्त्रों में वर्णित महत्व –

1. ब्रह्मचारी होने के कारण वंश नहीं: भीष्म पितामह का अपना कोई पुत्र या वंशज नहीं था जो उनका श्राद्ध करता। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर युधिष्ठिर ने उनका तर्पण किया था। तब से परंपरा है कि जो भी अपने पितरों का श्राद्ध करता है, वह पहले भीष्म को जल दे, ताकि अतृप्त आत्मा को भी तृप्ति मिले।

2. पितृपक्ष का पहला जल: गरुड़ पुराण और महाभारत के अनुसार पितृपक्ष के प्रथम दिन “भीष्म तर्पण” से ही पितृकार्य प्रारंभ होता है। मंत्र है –
“वैयाघ्रपद गोत्राय सांकृति प्रवराय च। गंगापुत्राय भीष्माय आजन्म ब्रह्मचारिणे। भीष्माय नमः। इदमर्घ्यम्।”

3. पितरों की मुक्ति का मार्ग: कहा जाता है कि भीष्म पितामह को जल देने से पितृ दोष शांत होता है, वंश में वृद्धि होती है और पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। प्रयागराज जैसे तीर्थ में गंगा के तट पर भीष्म तर्पण का फल कई गुना अधिक मिलता है।

अनामिका चौधरी ने कहा कि आज की पीढ़ी को अपने मूल और संस्कारों को जानना चाहिए। पितरों का सम्मान ही हमारी संस्कृति की जड़ है। उन्होंने सभी से अपील की कि पितृपक्ष में गंगा जी में स्नान कर, पहले भीष्म पितामह को अर्घ्य दें, उसके बाद अपने पितरों को जल अर्पित करें।

इस दौरान उन्होंने गंगा विचार मंच के माध्यम से लोगों को स्वच्छ गंगा और पितरों के प्रति कर्तव्य दोनों के बारे में जागरूक करने का संकल्प दोहराया।
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिवा त्रिपाठी पूर्व पार्षद व मंडल उपाध्यक्ष वेणीमाधव, अन्नू निषाद सेक्टर संयोजक,नेहा केशरी, विजय केशरी, सुमन बाला, जान्हवी निषाद महानगर संयोजक सांस्कृतिक विभाग, कैलाश दत्ता जिला सह संयोजक गंगा विचार मंच,अरूण निषाद महानगर सह संयोजक सेवा संकल्प, दिलीप सेन मंडल अध्यक्ष नमामि गंगे संगम,भीम सिंह मंडल अध्यक्ष बक्सी खुर्द, कालीचरण आनंद जिला सह संयोजक गंगा विचार मंच-नमामि गंगे, उपेंद्र सिंह चौहान एवं गीता चौहान, मेज़र सुनील निषाद आदि के साथ क्षेत्रीय लोगों ने प्रतिभाग किया।

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