राजभाषा एवं विज्ञान व्याख्यानमाला का आयोजन

भारत वसुधा को अपना परिवार और पश्चिम बाजार मानता है: प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी

प्रयागराज। भा.वा.अ.शि.प. – पारिस्थितिक पुनर्स्थापन केन्द्र, प्रयागराज (भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा दिनांक 23.09.2026 को “प्रकृति एवं पर्यावरण का भारत बोध” विषय पर एक दिवसीय ‘राजभाषा एवं विज्ञान व्याख्यानमाला – 2026’ का आयोजन किया गया। व्याख्यानमाला का शुभारम्भ मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) गिरीश चंद्र त्रिपाठी, पूर्व कुलपति, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय एवं अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। केन्द्र प्रमुख डॉ. संजय सिंह ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. त्रिपाठी ने अपने व्याख्यान में कहा कि भारत बोध में वसुधा को अपना परिवार माना जाता है लेकिन पाश्चात्य विचार वसुधा को बाजार मानता है, यह दृष्टियों का अंतर है। प्रो. त्रिपाठी ने आगे कहा कि हमारा सिद्धांत है- सर्वे भवंतु सुखिन:। भारत के पर्यावरण एवं प्रकृति बोध में परिवार का विचार है, यहां सभी एक दूसरे के पूरक हैं। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि प्रकृति रक्षा भारतीय विचार है हमें आधुनिकता से जुड़ना है लेकिन अपने मूल को छोड़ना नहीं है। विज्ञान के साथ संस्कृति रहेगी तभी विवेक पूर्ण विकास होगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध रंगमंच निदेशक प्रवीण शेखर ने कार्यक्रम को सुशोभित किया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक, आलोक यादव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। केन्द्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. अनुभा श्रीवास्तव द्वारा कार्यक्रम का सफल संचालन किया गया। केन्द्र द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला में पर्यावरण प्रेमियों, शोधार्थियों एवं विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने उपस्थित होकर ज्ञानवर्धक व्याख्यान का लाभ उठाया।

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