डॉ. सत्यवान सौरभ हरियाणा के एक छोटे-से कोने में बसा था छतरपुर गाँव। गाँव छोटा था, लेकिन उसके रिश्तों की दुनिया बहुत बड़ी थी। वहाँ आज भी सुबह मिट्टी की सोंधी खुशबू के साथ होती थी और शामें चौपाल की बतकही में ढलती थीं। पीपल के पुराने पेड़ पर बैठी चिड़ियाँ जैसे हर घर का हाल जानती थीं। सूरज की पहली किरण जब कच्ची गलियों पर उतरती, तो स्कूल की पोशाक पहने बच्चे किताबों का बस्ता कंधे पर लटकाए दौड़ पड़ते और औरतें सिर पर परात या घड़ा रखे कुएँ…
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