धागों से बंधा सपना

डॉ. सत्यवान सौरभ हरियाणा के एक छोटे-से कोने में बसा था छतरपुर गाँव। गाँव छोटा था, लेकिन उसके रिश्तों की दुनिया बहुत बड़ी थी। वहाँ आज भी सुबह मिट्टी की सोंधी खुशबू के साथ होती थी और शामें चौपाल की बतकही में ढलती थीं। पीपल के पुराने पेड़ पर बैठी चिड़ियाँ जैसे हर घर का हाल जानती थीं। सूरज की पहली किरण जब कच्ची गलियों पर उतरती, तो स्कूल की पोशाक पहने बच्चे किताबों का बस्ता कंधे पर लटकाए दौड़ पड़ते और औरतें सिर पर परात या घड़ा रखे कुएँ…

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विधायक की कार, भत्ता और सत्ता

हर विधायक को कार मिले, साथ में मिलता भत्ता, जनता पूछे-“हमको कब?” नेता बोले-“बस सत्ता!” पचहत्तर हजार “कार” के, पच्चीस हजार सहायक, गाँव-गाँव अब घूमिए साहब, बन जनसेवा-नायक। कहते हैं-जनता की सुनना, हर मुश्किल हल करना, तीन माह में रिपोर्ट बनाना, हरेक वादा पूरा करना। ये कार नई है, राह पुरानी, जनता फिर भी पैदल है, साहब की गाड़ी दौड़ रही, गाँव अब भी दलदल है। किसान कहे-“मेरी सुन लो,” युवा कहे-“रोजगार दो,” गुरु बोले-“स्कूल सँवारो,” मजूर कहे-“अधिकार दो।” कार मिले तो ठीक साब, जनता को भी याद रखिए, सरकारी…

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जमाखोरों और मुनाफाखोरों पर निगाह जरूरी

इंजी.अतिवीर जैन “पराग हर वर्ष बरसात के मौसम में प्याज की आपूर्ति में कमी होने से उसके मूल्य में वृद्धि हो जाती है । लेकिन बार-बार ऐसा होने पर भी सरकार इससे कुछ सबक नहीं लेती और मूल्य वृद्धि होने के बाद जागती है। चीनी के भी मूल्य बढ़ने के बाद सरकार को चीनी का आयात करना याद आया । जिसको आने में समय लगेगा और तब तक के लिए बड़े मूल्य नागरिकों को देने होंगे । प्याज का अगर सरकार के पास बफर स्टॉक है तो उसे सही समय…

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सावन में हरा रंग और चारों ओर छायी हरियाली

सुनीता कुमारी पूर्णियां बिहार सावन का महीना आते ही प्रकृति जैसे अपने माथे पर हरी चुनरी सजा लेती है। सूखी धरती पर जब पहली बारिश की बूंदें गिरती हैं, तो मिट्टी की सौंधी खुशबू के साथ जीवन की एक नई अनुभूति जन्म लेती है। पेड़-पौधों की शाखाएँ हरी हो उठती हैं, खेतों में फसलें लहलहाने लगती हैं, तालाब और पोखर पानी से भरने लगते हैं और चारों ओर हरियाली का ऐसा विस्तार दिखाई देता है, मानो प्रकृति ने अपनी सारी सुंदरता इसी मौसम के लिए बचाकर रखी हो। सावन केवल…

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अवतरण एवं अध्ययन

डॉ सच्चिदानंद श्रीवास्तव काल समय वक़्त अपनी गति रफ्तार से चलता रहता है प्रत्येक दिन लाखो जातक जन्म लेते है एवं मरते है लेकिन कभी कभार ऐसा भी पल प्रहर आता है जो साधारण मे असाधारण क़ो अंकुरित कर जाता है और जो भविष्य का बट बृक्ष समय काल युग कि दृष्टि दृष्टिकोण बन भय भ्रम के अंधकार मे भर्मित काल समय क़ो नई परिभाषा एवं ऊँचाई देकर चमत्कार का सर्व सत्कार बनकर अपने समय काल भाग्य भगवान क़ो प्रस्तावित कर सर्व ग्राह सर्वस्वीकार्य स्वरूप मे प्रतिष्ठापित करता है! ऐसे…

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जिन्दगी पर भारी पड़ती मोबाइल की लत

मनोज कुमार अग्रवाल मोबाइल की लत बच्चों की दिनचर्या को एक दशक से बुरी तरह से प्रभावित कर रही है लेकिन अब तो यह जिन्दगी पर भी भारी पड़ने लगी है महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक महंगे आईफोन को पाने और उसकी किस्त चुकाने की एक किशोर छात्र की जिद में हंसते-खेलते परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक मां ने गेम न खेलने और मोबाइल फोन देने से इनकार किया तो 14 वर्षीय बेटे ने खुदकुशी कर ली।…

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पूंजी प्रवाह से सुदृढ़ हुई भारतीय अर्थव्यवस्था

महेन्द्र तिवारी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह सप्ताह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि लेकर आया है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 716.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो लगभग छह महीने का सर्वोच्च स्तर है। एक ही सप्ताह में इसमें लगभग 9.9 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की वित्तीय मजबूती, निवेशकों के बढ़ते विश्वास और बाहरी भुगतान क्षमता का स्पष्ट संकेत भी है। लगातार सात सप्ताह से…

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आस्था का सम्मान, लेकिन गलत बातों पर सवाल जरूरी

डॉ. सत्यवान सौरभ धर्म मनुष्य के जीवन में केवल पूजा-पद्धति या कर्मकांड का विषय नहीं है। वह उसकी आस्था, संस्कृति, नैतिकता, परंपरा और जीवन-दृष्टि से जुड़ा हुआ विषय है। धार्मिक ग्रंथों ने हजारों वर्षों से समाज को नैतिक मूल्यों, कर्तव्य, करुणा, संयम, सत्य और परोपकार का संदेश दिया है। यही कारण है कि करोड़ों लोग धार्मिक पुस्तकों को श्रद्धा के साथ पढ़ते और अपने जीवन में उनसे प्रेरणा लेते हैं। लेकिन श्रद्धा का अर्थ यह नहीं हो सकता कि किसी भी पुस्तक में लिखी प्रत्येक बात को बिना प्रश्न किए,…

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स्कूलों में छात्राओं से छेड़खानी (शिक्षा के मंदिर में भरोसे का संकट)

डॉ. प्रियंका सौरभ स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं होते। वे बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार, अनुशासन और सुरक्षित भविष्य की नींव रखते हैं। माता-पिता जब अपने बच्चों को विद्यालय भेजते हैं तो उनके मन में यह विश्वास होता है कि शिक्षक उनके बच्चे को ज्ञान देने के साथ-साथ उसकी सुरक्षा और गरिमा का भी ध्यान रखेंगे। लेकिन जब इसी भरोसे की आड़ में किसी शिक्षक द्वारा छात्रा के साथ छेड़खानी, अनुचित व्यवहार या यौन उत्पीड़न की घटना सामने आती है, तो चोट केवल एक बच्ची को नहीं लगती; पूरा…

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वंदे मातरम् पर फिर सियासत

महेन्द्र तिवारी वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अजर अमर और अत्यंत पवित्र स्मृति है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह महान रचना केवल शब्दों और ध्वनियों का साधारण समूह नहीं है, बल्कि यह उस युग की धड़कन है जब लाखों भारतीयों ने परतंत्रता की मजबूत बेड़ियों को तोड़ने का कठोर संकल्प लिया था। इस अद्वितीय रचना ने भारत माता को एक देवी के रूप में स्थापित किया और जनमानस में देशभक्ति की ऐसी प्रचंड ज्वाला प्रज्वलित की जिसने शक्तिशाली विदेशी शासन की नींव तक हिला दी। आनंदमठ नामक प्रसिद्ध उपन्यास से…

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