हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने कहा है कि हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष में “स्पष्ट हार” का सामना करने के बाद भारत अब पाकिस्तान के खिलाफ अपने “दुष्ट एजेंडे” को प्रॉक्सी (छद्म) संगठनों के माध्यम से दोगुनी गति से आगे बढ़ा रहा है। हम आपको यह भी याद दिला दें कि दो दिन पहले ही पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर पाकिस्तान में आतंकवाद की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा था कि भारत आतंकवादी संगठनों को समर्थन दे रहा है। इसी बात को दोहराते हुए, फील्ड मार्शल मुनीर ने गुरुवार को जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में आयोजित 271वें कोर कमांडर्स सम्मेलन (CCC) की अध्यक्षता करते हुए कहा कि “पहलगाम घटना के बाद पाकिस्तान के खिलाफ प्रत्यक्ष आक्रामकता में स्पष्ट हार के बाद, भारत अब ‘फ़ितना-ए-ख़वारिज़’ और ‘फ़ितना-ए-हिंदुस्तान’ जैसे प्रॉक्सियों के माध्यम से अपना दुष्ट एजेंडा आगे बढ़ा रहा है।”
हम आपको बता दें कि पिछले वर्ष जुलाई में पाकिस्तान सरकार ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को ‘फ़ितना-ए-ख़वारिज़’ घोषित किया था और सभी संस्थानों को निर्देश दिया था कि पाकिस्तान पर आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को ‘खारिजी’ (निर्वासित) कहा जाए। इस वर्ष मई में पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान में सक्रिय सभी आतंकवादी संगठनों को ‘फ़ितना-ए-हिंदुस्तान’ घोषित किया। हम आपको बता दें कि यह एक नया शब्द है जिसका उद्देश्य भारत की भूमिका को संदिग्ध बनाना है। पाकिस्तान की ISPR के एक बयान में कहा गया है कि CCC के प्रतिभागियों ने “भारत प्रायोजित प्रॉक्सियों” द्वारा हाल ही में किए गए आतंकी हमलों में शहीद हुए लोगों के लिए प्रार्थना की।
बयान में कहा गया है कि “आतंकी प्रॉक्सियों के खिलाफ हालिया सफलताओं की समीक्षा करते हुए, फोरम ने संकल्प लिया कि हमारे शहीदों का खून व्यर्थ नहीं जाएगा और पाकिस्तान की जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। फोरम ने यह भी जोर देकर कहा कि भारत समर्थित और प्रायोजित प्रॉक्सियों के खिलाफ सभी स्तरों पर निर्णायक और समग्र कार्रवाई आवश्यक है।” ISPR ने यह भी कहा कि फोरम ने भारतीय सेना के “तथ्यहीन आरोपों” पर ध्यान दिया, जो उसकी “पूर्ण हार” को छिपाने का प्रयास हैं। देखा जाये तो यह संभवतः भारतीय सेना के उप-प्रमुख के उस दावे की ओर संकेत था, जिसमें कहा गया था कि चीन ने संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद को भारत की प्रमुख सैन्य स्थितियों की “सीधी जानकारी” दी थी।
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