एक यूजर ने तो ये भी दावा किया कि रेडिएशन को नियंत्रित करने में इस्तेमाल होने वाला मिस्र का एक विमान बोरोन पाकिस्तान पहुंचा। अमेरिका का रेडिएशन मॉविटिरिंग विमान वहां की स्थिति की जांच कर रहा है। इन दावों ने इतनी तेजी से हवा पकड़ी की लोग डर और उत्सुकता के मिश्रित भाव से इसे शेयर करने लगे। वहीं देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भी सीधे कह डाला कि अब न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं सहेगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं सहेगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को न्याय की अखंड प्रतिज्ञा बताया। भविष्य में भी आतंकी हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
रेडिएशन लीक जैसी घटना कोई छोटी बात तो नहीं है। अगर ऐसा कुछ हुआ होता तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा परमाणु एजेंसी यानी आईएईए और विश्व स्वाथ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) तुरंत हरकत में आते। लेकिन 13 मई 2025 तक आईएईए या किसी अन्य विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय संगठन ने इस तरह की किसी भी घटना कि पुष्टि नहीं की है। पाकिस्तान के परमाणु संयंत्र जैसे कराची न्यूक्लियर पावर प्लांट और चश्बा न्यूक्लियर पावर प्लांट से रेडिएशन लीक होने की स्थिति में तुरंत स्थानीय और वैश्विक स्तर पर अलर्ट जारी किए जाते। लेकिन पाकिस्तान के परमाणु ऊर्जा आयोग यानी की पाकिस्तान ऑटोमिक एनर्जी कमीशन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
गौरतलब है कि 12 मई को भारतीय सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया है कि भारतीय हमलों में इनमें से ज्यादातर ठिकानों को निशाना बनाया गया है। भारत ने पाकिस्तान के शोरकोट में रफीकी एयरबेस, रावलपिंडी में नूर खान एयरबेस, चकवाल में मुरीद, रहीमयार खान, सुक्कुर और चुनियन के साथ-साथ पसरूर और सियालकोट में रडार साइटों को निशाना बनाया। इसके अलावा सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि कराची में स्थित मलीर छावनी पर भी भारत ने हमला किया था। इसका मतलब यह है कि भारतीय वायुसेना ने इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर, सियालकोट, सरगोधा और कराची सहित पाकिस्तान के हर बड़े शहर में ठिकानों पर बमबारी की।
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