सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि अवंती बाई लोधी जी का जन्म मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के मनकेहणी ग्राम में एक जमींदार परिवार में राव जुझार सिंह और माता कृष्णा बाई के वहां हुआ था। घुड़सवारी, तलवारबाजी और शस्त्र संचालन में विशेष निपुण अवंतीबाई लोधी का विवाह रामगढ़ के राजा लक्ष्मण सिंह के पुत्र राजकुमार विक्रमादित्य सिंह लोधी के साथ हुआ था। पति विक्रमादित्य सिंह के अस्वस्थ रहने और बाद में उनके निधन के बाद, रानी ने अपने दोनों नाबालिग पुत्रों (अमान सिंह और शेर सिंह) के संरक्षक के रूप में रामगढ़ की शासन-सत्ता संभाली।अंग्रेजों ने हड़प नीति के तहत रामगढ़ रियासत को ‘कोर्ट ऑफ वॉर्ड्स’ के नियंत्रण में लेने की कोशिश की, जिसे रानी ने ठुकरा दिया और अंग्रेजी प्रशासकों को राज्य से बाहर खदेड़ दिया। 1857 के विद्रोह के दौरान रानी ने आसपास के राजाओं और जमींदारों को अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया और 23 नवंबर 1857 को रानी अवंतीबाई ने मंडला के डिप्टी कमिश्नर वडिंगटन की सेना को खैरी के युद्ध में करारी शिकस्त दी।अंग्रेजों की विशाल सेना से मुकाबला करते हुए अंततः उन्हें देवहारीगढ़ की पहाड़ियों की तरफ जाना पड़ा। 20 मार्च 1858 को अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण करने की बजाय उन्होंने अपनी ही तलवार से अपना बलिदान दे दिया और वीरगति को प्राप्त हुईं।ऐसी महान वीरांगना को जन्म जयंती पर शत- शत नमन है।
उक्त अवसर पर उपस्थित हरिश्चंद्र यादव, लक्ष्मण सिंह बाढू, वीरेंद्र शर्मा,सुरेश नारायण सिंह, दयानंद यादव, वेलभद्र गोंड, चंद्रेश यादव, रामनयन प्रसाद,नारायण प्रसाद, नगीना यादव, हरगोविन्द कन्नौजिया,शंकर गोंड, श्यामराज कन्नौजिया, अम्बेडकर प्रसाद,संतोष मद्धेशिया, संपूर्णानंद जायसवाल,फेंकू यादव आदि ने अवंती बाई लोधी को उनके चित्र के समक्ष श्रद्धावनत हो नमन किया।
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