मैं उन्हें भारत की ही श्रेणी में मानता हूं और उन्हें पाकिस्तान का दुश्मन समझता हूं।’’ वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि जेएएसी ने उनके साथ एक बैठक की थी और अपनी 38 मांगें रखी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद और मीरपुर पर बलपूर्वक कब्जा करना चाहते हैं। सनाउल्लाह ने मंगलवार को दावा किया कि वे फिलहाल ‘‘भारत जैसे हमले’’ में लगे हुए हैं।
सनाउल्लाह ने यह भी दावा किया कि कानून प्रवर्तन कर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में किसी की मौत नहीं हुई है। हालांकि, कार्यकर्ता समूहों के गठबंधन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने बुधवार को कहा कि पिछले दो दिनों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 37 निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों समेत ऐसे लोगों को भी मार दिया, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे और जो प्रदर्शन का हिस्सा भी नहीं थे। जेएएसी के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
जेएएसी ने कहा कि हिंसा सोमवार को उस समय भड़की, जब एक मार्च शुरू किया गया था। यह मार्च ऐसे समय निकाला गया जब पीओके की तथाकथित विधानसभा के लिए पहले चरण का चुनाव हो रहा था। जेएएसी ने एक बयान में कहा कि बड़ी संख्या में लोग गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
उसने आरोप लगाया, “अस्पतालों पर सुरक्षा बलों का नियंत्रण है, चिकित्सकों को हटा दिया गया है और दवा दुकानों में दवाएं खत्म हो चुकी हैं। जो स्वयंसेवक मृतकों या घायलों को उठाने की कोशिश कर रहे हैं, उनपर भी गोलीबारी की जा रही है।” जेएएसी ने ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ से अपील की कि वह तुरंत रावलकोट में स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा दल भेजे। इस बीच, बीबीसी उर्दू की खबर के अनुसार, बुधवार को मीरपुर में दुकानें और बाजार बंद रहे।
प्राधिकारियों ने क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इसके अलावा, जेएएसी के प्रदर्शन की खबरों के प्रसारण और प्रकाशन पर पाकिस्तान में पूरी तरह से मीडिया प्रतिबंध लगा दिया गया है। ‘जियो न्यूज’ से मंगलवार को बातचीत में राणा सनाउल्लाह ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अतीत में प्रशिक्षित किए गए कुछ आतंकियों ने बाद में अपने हथियार उसी देश के खिलाफ उठा लिये।
पीओके में जारी अशांति पर पूछे गए सवालों के जवाब में सनाउल्लाह ने कहा कि वहां के प्रदर्शनकारी उन ‘मुजाहिदीन’ जैसे हैं, जिन्हें पाकिस्तान ने पहले प्रशिक्षित किया था, लेकिन बाद में वे पाकिस्तान के खिलाफ हो गए। उनकी यह स्पष्ट टिप्पणी पाकिस्तान की उस नीति के दीर्घकालिक परिणामों की ओर संकेत करती है, जिसमें उसने आतंकी समूहों को समर्थन और प्रशिक्षण दिया था। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों में ऐसे संगठनों के सदस्य भी शामिल हैं, जिनके पास हथियार हैं और जिनकी कोई वास्तविक राजनीतिक मांग नहीं है।
सनाउल्लाह ने कहा, “वे लोगों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं और एक खेल खेल रहे हैं।” उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अफगान युद्ध के दौरान आतंकी समूहों के साथ पाकिस्तान के संबंध और उसके बाद उनकी गतिविधियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय निगरानी का विषय रहे हैं। कई अध्ययनों में अफगानिस्तान और कश्मीर में सक्रिय आतंकी समूहों को पाकिस्तान के समर्थन का उल्लेख किया गया है।
साथ ही, इन अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि बाद में इस आतंकवादी ढांचे के कुछ हिस्सों ने पाकिस्तान के भीतर हिंसा को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई। पीओके की तथाकथित विधानसभा की 13 सीट के लिए सोमवार को हुए पहले चरण के चुनाव में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने नौ सीट जीतीं, जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को चार सीट मिलीं। बाकी 32 सीट के लिए दूसरे और तीसरे चरण का चुनाव क्रमश: दो और 10 अगस्त को होगा।
पीओके में मुख्य मुकाबला पीएमएल-एन और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बीच है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने चुनाव का बहिष्कार किया है। पहले चरण का चुनाव हिंसा और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों से प्रभावित रहा। केंद्र में पीएमएल-एन के साथ गठबंधन में शामिल पीपीपी ने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर हेरफेर करके पीएमएल-एन को अधिकतर सीट दिलाई गईं।
जेएएसी पिछले महीने से पीओके में तथाकथित क्षेत्रीय विधानसभा की 12 विवादित सीट को लेकर प्रदर्शन कर रही है। उसका आरोप है कि प्रतिष्ठान इन सीट के जरिये अपनी पसंद के प्रधानमंत्री को सत्ता में लाने के लिए हस्तक्षेप करता है। भारत ने मंगलवार को इन चुनाव को पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध कब्जे और क्षेत्र में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों को छिपाने की कोशिश बताया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को दिल्ली में कहा, ‘‘इस मामले पर भारत का रुख स्पष्ट, एक समान और सर्वविदित है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें वर्तमान में पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि हमने पहले भी कहा है, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के आर्थिक शोषण, लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन और उसके प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम हैं।’’ जेएएसी ने नौ जून से पीओके में विरोध प्रदर्शन और मार्च शुरू किया था। सोमवार की हिंसा से पहले अशांति में कथित तौर पर 40 लोग मारे जा चुके थे, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह पुलिस एवं अर्द्धसैनिक कर्मी शामिल थे।
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