सरेनी (रायबरेली)।सरकारी धन को ठिकाने लगाने और विकास के नाम पर ‘कागजी महल’ खड़े करने का खेल सरेनी विकासखंड में चरम पर है। सरेनी के सगरा गांव के पास नहर पर बन रही पुलिया इसका जीता-जागता सबूत बन चुकी है। यहाँ विकास की बुनियाद मजबूत पत्थरों या नंबर-1 ईंटों पर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की ‘पीली और कच्ची ईंटों’ पर खड़ी की जा रही है। ठेकेदार की दबंगई और विभागीय इंजीनियरों की रहस्यमयी मुस्तैदी (या मिलीभगत) के चलते राहगीरों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया गया है।
खोखले ‘विकास’ का पीला सच!
सगरा गांव के पास राहगीरों को जलभराव और आवागमन की समस्या से निजात दिलाने के लिए इस पुलिया का निर्माण शुरू कराया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उनकी राह आसान होगी, लेकिन ठेकेदार ने उनकी उम्मीदों पर घटिया सामग्री का पीला रंग फेर दिया। मौके पर मौजूद ईंटें इतनी कमजोर हैं कि हाथ लगाते ही टूट जा रही हैं। मानक दरकिनार हैं, सीमेंट-बालू का अनुपात सिर्फ नाम का है, और तकनीकी गाइडलाइंस को पूरी तरह हवा में उड़ा दिया गया है।
‘कमीशनखोरी’ के फेर में फंसा राहगीरों का जीवन नहर पर बनने वाली इस पुलिया से भविष्य में ट्रैक्टर-ट्रॉली, कमर्शियल वाहन और सैकड़ों ग्रामीणों को गुजरना है। ऐसे में यह घटिया निर्माण किसी बड़े और खूनी हादसे का इंतजार कर रहा है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि:
“यह निर्माण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की खुली नुमाइश है। पीली ईंटों से बनी यह पुलिया पहली ही बाढ़ या भारी वाहन का दबाव नहीं झेल पाएगी। अफसरों की नाक के नीचे यह खेल चल रहा है, जिससे साफ है कि कमीशन का खेल ऊपर तक है।”
जांच के नाम पर सिर्फ ‘खानापूरी’ का डर
हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया से लेकर ग्रामीणों की शिकायतों तक मामला गूंज रहा है, लेकिन संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी (JE/AE) एयरकंडीशंड कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि शिकायत के बाद भी ठेकेदार धड़ल्ले से उसी घटिया सामग्री से काम को आगे बढ़ा रहा है, मानो उसे किसी बड़े रसूखदार का संरक्षण प्राप्त हो।
चेतावनी: रुका काम, तो थमेगा सरेनी!
इस खुली लूट के खिलाफ अब सगरा सहित आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने लामबंद होना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि अगर 24 घंटे के भीतर निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच नहीं हुई और घटिया ईंटों को मलबे में नहीं फेंका गया, तो निर्माण कार्य को जबरन ठप कराकर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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