मीर यार बलोच हैं वो अपने आप को बलूचिस्तान समर्थक बताते हैं, पत्रकार बताते हैं, एक्टिविस्ट बताते हैं। उन्होंने ये बकायदा ऐलान किया है कि बलूचिस्तान अब आजाद हो चुका है और बलूचिस्तानियों का 80% इलाके पर कब्जा हो गया है। इस वीडियो में उस परिस्थिति की बात करेंगे कि क्या हालात है। बलूचिस्तान में कई अलग-अलग मोर्चों पर पाकिस्तान का विरोध हो रहा है। पाकिस्तान की सरकार का विरोध हो रहा है। सेना का विरोध हो रहा है। क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन? ये भी समझिए। वहां पर पानी की जो गंभीर समस्या है, कथित जबरन जो डिसअपीयरेंस है जो लोग गायब करा दिए जा रहे हैं। हिंसा बढ़ रही है, गुस्सा बढ़ रहा है। कई इलाकों में लोग पानी की कमी और सरकारी लापरवाही के खिलाफ सड़कों पर हैं। वहीं बलोच यख जिहाती कमेटी के नेतृत्व में लापता लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की बरामदगी की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा हालिया जो बंद हथियार बंद समूह है बलोच लिबरेशन आर्मी बलोच लिबरेशन फ्रंट वो लगातार जो है वो मांग कर रहे हैं एक्शन कर रहे हैं पाकिस्तान की सेना पर वो दूसरा दबाव है और इन सबके बीच जो हथियार समूहों के हमले में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की मौत के बाद उनके परिजन हैं वो भी बेहतर सुरक्षा और न्याय की मांग करते हुए विरोध कर रहे हैं। यानी कि चौतरफ़ा बलूचिस्तान के मोर्चे पर पाकिस्तान घिरता हुआ दिखाई पड़ता है।
बलूचिस्तान लंबे वक्त से पाकिस्तान से अह जो है वो आजादी चाह रहा है और पाकिस्तान के लिए बहुत संवेदनशील इलाका रहा है। वहां पाकिस्तानी सेना सरकार शोषण दोहन चाहती है। लेकिन वहां विरोध है और बीते कुछ वर्षों में हालात बद से बदतर हुए हैं। रणनीतिक मामलों के जानकार दावा करते हैं कि पाकिस्तानी सरकार का नियंत्रण अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित है। जबकि ग्रामीण इलाकों में हथियार बंद समूहों की एक्टिविटी इतनी है कि वहां थानों में वहां पोस्ट में सैनिक नहीं रहना चाहते हैं। पुलिस वाले नहीं रहना चाहते हैं। अपनी वर्दी जब पहनकर कोई वहां जाता है तो लोग कहावत के तौर पर कहते हैं कि ये आखिरी अलविदा है। उसके बाद अब ये लौट कर नहीं आ पाएगा। तो ये स्थिति है। रिपोर्ट्स कहते हैं कि बलूच विद्रोही लगातार सैन्य काफिलों, अजम्गों और सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले करते हैं। जाफर एक्सप्रेस पर हुए कई हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। इतना ही नहीं चीन के निवेश वाले परियोजना पर भी संकट मंडरा गया क्योंकि लगातार हमले हो रहे हैं। इसके अलावा रेको डिक जैसे बड़े माइनिंग प्रोजेक्ट्स को लेकर भी सुरक्षा चिंताएं हैं। अमेरिका और दूसरे देशों के साथ जो पाकिस्तान डील करने की कोशिश कर रहा है उसने भी बड़ा इंपैक्ट किया है क्योंकि लगातार हमले हो रहे हैं। सवाल खड़े हो गए हैं।
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