सीबीएसई के मुताबिक, प्रत्येक 500 स्टूडेंट्स पर एक काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। यानी काउंसलर-स्टूडेंट अनुपात 1:500 रखा जाएगा। स्कूलों में काउंसलिंग और वेलनेस टीचर, जो सोशियो-इमोशनल काउंसलर हो और करियर काउंसलर की नियुक्ति अब सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में अनिवार्य होगी। आपको बता दें कि, यह संशोधन सीबीएसई एफिलिएशन कमिटी की सिफारिशों और गवर्निंग बॉडी की मंजूरी के बाद अधिसूचित किया गया है। नए संशोधन के तहत अब हर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी सीबीएसई स्कूल को दो अलग-अलग भूमिकाओं के लिए नियुक्ति करनी होगी।
– पहली भूमिका- काउंसलिंग और वेलनेस टीचर (सोशियो-इमोशनल काउंसलर)
– दूसरी भूमिका – करियर काउंसलर
कौन होगा सीबीएसई कांउलिंग और वेलनेस टीचर?
आपको बताते चलें कि, इस पोस्ट के लिए साइकलॉजी (क्लिनिकल/ काउंसलिंग/ एप्लाइड/ एजुकेशनल) में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन किया होना या मानसिक स्वास्थ्य/ काउंसलिंग में सोशल वर्क की डिग्री या किसी भी सब्जेक्ट में यूजी/पीजी डिग्री + डिप्लोमा इन स्कूल जरूरी है। इन्हें सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान, अभिभावक-शिक्षक संवेदनशीलता और प्राइवेसी जैसे क्षेत्रों का नॉलेज होना जरुरी है।
सीबीएसई करियर काउंसलर कौन होगा?
करियर काउंसलर के लिए ह्यूमैनिटीज, साइंस, सोशल साइंस, मैनेजमेंट, एजुकेशन या टेक्नोलॉजी में बैचलर्स/मास्टर्स डिग्री जरुरी होगी। इनको करियर असेसमेंट, हायर एजुकेशन (भारत और वैश्विक स्तर) की जानकारी, रिसर्च स्किल्स और स्टूडेंट्स-पेरेंट्स को करियर गाइडेंस देने में सक्षम होना होगा।
दोनों ही पदों पर नियुक्त व्यक्तियों को कम से कम 50 घंटे के कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम (CBPs) भी पूरे करने होंगे। सीबीएसई ने यह भी साफ किया है कि जहां करियर काउंसलर नहीं है, वहां स्कूल अस्थायी रुप से किसी प्रशिक्षित शिक्षक को नॉमिनेट कर सकता है, हालांकि उसे दो एकेडेमिक सेशन के भीतर तय योग्यता पूरी करनी होंगी।
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