संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सत्यकाम ने कहा- “भारतीय लोक संस्कृति गंगा की धारा के समान पावन और निरंतर है। नवाचार इसकी जीवंतता की वह कड़ी है, जिससे इसे और ज़्यादा बल मिलेगा।” साथ ही संगोष्ठी के दौरान प्रो प्रेम कुमार मल्लिक, उर्मिला शर्मा, अभिलाष नारायण बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल रहे और डॉ आकांक्षा पाल, डॉ दीनानाथ मौर्या, प्रो राजेश वर्मा ने क्रमश: तीन सत्रों में सत्र समन्वयक की भूमिका निभाई। श्री आनंद वर्धन शुक्ल, डॉ महेश सिंह, श्री इष्टदेव, प्रो संजय, डॉ अभिजीत दीक्षित, प्रो कल्पना दुबे, प्रो अनीता गोपेश, श्री लोकेश शुक्ला, डॉ रक्षा सिंह और डॉ विशाल जैन ने संगोष्ठी में अहम भूमिका में रहे।
संध्या प्रस्तुति में श्री मन्नू यादव जी ने बिरहा गायन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। पद्म श्री से सम्मानित विदुषी उर्मिला श्रीवास्तव जी के गायन पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान हो उठा।
तत्पश्चात श्री अतुल यदुवंशी के नेतृत्व में नौटंकी: बहुरुपिया देख आगंतुकों के बीच उर्जा का संचार हो उठा।
लोक संस्कृति उत्सव में कई प्रकार की प्रतियोगिताओं से छात्रों के बीच इस विषय से जुड़ी उत्सुकता बढ़ी। 50 से ज्यादा विद्यालयों से आए 500 से ज्यादा छात्रों ने राष्ट्रीय लोक संस्कृति प्रतियोगिता में गायन, नृत्य, रंगोली और चित्रकला में अपनी योग्यता का प्रदर्शन किया।
उत्सव क्षेत्र में कठपुतली खेल, अलग-अलग स्टॉल, ग्रामीण परिवेश की झलक ने चार चांद लगा दिया।
इस कार्यक्रम के दौरान श्रीमती मधु शुक्ला, डॉ मृत्युंजय राव परमार, श्रेयश शुक्ला, शांभवी शुक्ला आदि मौजूद रहे।
कल का कार्यक्रम
कल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ़ मीडिया स्टडीज के पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ धनंजय चोपड़ा विशेष कथा कथन करेंगे। साथ ही श्री फ़ौजदार सिंह आल्हा की प्रस्तुति करेंगे और कवि सम्मेलन में नीलोत्पल मृणाल, शिवम् भगवती जैसे दिग्गज समां बांधेंगे।
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