आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की साहित्यिक सत्ता भारतीय चिन्तन-परम्परा के आलोक मे एक दार्शनिक सम्प्रेषण है”– प्रो० उमापति दीक्षित ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ‘सर्जनपीठ’ के तत्त्वावधान मे प्रसिद्ध निबन्धकार और आलोचक आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की जयन्ती के अवसर पर ‘साहित्य-जगत् मे आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की सत्ता और महत्ता’ विषयक एक आन्तर्जालिक राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन उनकी जन्मभूमि बलिया और प्रयागराज से एक साथ किया गया, जिसमे देश के प्रतिष्ठित प्रबुद्धवृन्द की वैचारिक सहभागिता रही। आगरा से केन्द्रीय हिन्दी-संस्थान मे सांध्यकालीन पाठ्यक्रम-विभाग के अध्यक्ष प्रो० उमापति दीक्षित ने बताया, “आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की…
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