नेहरू से मोदी तक : लोकतंत्र, विकास और विरासत की नई व्याख्या

डॉ.रवि शंकर कुमार चौधरी स्वतंत्र भारत की यात्रा केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है। यह विचारों, संस्थाओं, संघर्षों, उपलब्धियों और निरंतर परिवर्तन की गाथा है। पिछले लगभग आठ दशकों में भारत ने लोकतंत्र को स्थापित किया, युद्धों का सामना किया, हरित क्रांति और श्वेत क्रांति का अनुभव किया, आर्थिक उदारीकरण अपनाया, सूचना-प्रौद्योगिकी की वैशिक शक्ति के रूप में उभरा और आज डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक कूटनीति में अपनी नई पहचान बना रहा है। इन सबके बीच भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति में गहरे परिवर्तन हुए हैं। ऐसे…

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बारिश में एक स्त्री…!

भीगती हुई शाम, वह चुपचाप खड़ी थी, बादलों से नहीं, पुराने ख़त से बात करती। बालों से टपकती बूँदें गालों पे ठहर जातीं, आँखें-दूर आसमां में अनकहे उत्तर खोजतीं। बारिश तो रोज़ होती है, मगर हर एक बूँद एक जैसी कहीं भी न होती। कुछ मिट्टी को भिगोती, कुछ यादों को। उसके होंठों पर कोई शिकायत न थी, बस, एक अधूरा-सा प्रश्न कोंध रहा था- “क्या? लौटकर आएगा वह मौसम, जो कभी मेरे हिस्से में था?” पेड़ की छाँव उसे पूरा नहीं ढक पाई, क्योंकि कुछ बारिशें बाहर नहीं, अंदर…

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आर्य-अनार्य बहस: कौन हैं भारत के मूल निवासी?

ममता तिवारी “मृदुला” बरिष्ठ कवयित्री, छत्तीसगढ़ मैं इतिहासकार, न भूगोल-खगोलवेत्ता हूँ, न ही कोई वैज्ञानिक। लेकिन निम्नांकित बात बिना शोध-अनुसंधान के, साधारण बुद्धि वाली मुझ जैसी एक कवयित्री को भी समझ आ सकती है, तो मेरा मानना है कि हर कोई इस तथ्य को समझ सकता है। लेकिन दूसरों को उलझाकर भटकाने वाले लोग स्वयं भटकते हैं। दुनिया में सबसे प्राचीन लिखित ग्रंथ वेद हैं। वेद चार हैं। सनातनी वेद को स्वयं भगवान मानते हैं। वेद ब्रह्मा-ब्रह्माणी के हाथों में रखे हुए हजारों साल पुरानी मूर्तियों में दर्शाए गए हैं।…

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हमारी विरासत और भविष्य : सामाजिक सद्भाव की पुनर्स्थापना का मूल

डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय   हमारे बचपन के वो दिन और आज का दिन बहुत बदल गया है । स्मृति के झरोखों में जब हम सन् साठ और सत्तर के दशक में झांकते हैं तो एक अलग भारत दिखाई देता है। दशहरे की रामलीला में मुस्लिम परिवारों की भीड़, मोहर्रम के जुलूस में हिंदू भाइयों का नगाड़ा बजाना, ईद पर सेवइयां और होली पर गुझिया का आदान-प्रदान। बाजार, मेले और त्योहार धर्म से ऊपर उठकर “उत्सव” बन जाते थे। खेल-संसार और शिक्षा जगत में कही कोई दुराव नहीं था ।…

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नर्मदा तट का पांडवकालीन तीर्थ: विमलेश्वर-चंद्रेश्वर महादेव

अर्पण जैन ‘अविचल मोक्षदायिनी नर्मदा सुरम्य सौंदर्य और पाप नाशिनी स्वरूप में कलयुग में विद्यमान है और इसके तटीय साम्राज्य में अनगिनत शिव तीर्थ हैं, जो ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे ही तीर्थों में एक तीर्थ मध्यप्रदेश में नर्मदा के उत्तर तट पर निमाड़ क्षेत्र में खरगौन जिले के बड़वाह से लगभग सात किमी दूर सनवाद मार्ग में पुल से पूर्व ही बेलसर गाँव में स्थित है।यहां अति प्राचीन विमलेश्वर एवं चंद्रेश्वर महादेव मंदिर है। विमलेश्वर के शाब्दिक अर्थ विमल (निर्मल/पवित्र) ईश्वर (स्वामी), अर्थात् वह ईश्वर…

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लाल किले की प्राचीर से आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का संदेश

कुमार कृष्णन 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 80वें स्वतंत्रता दिवस का संबोधन केवल सरकार की उपलब्धियों का ब्योरा नहीं था। यह 2047 के विकसित भारत की राजनीतिक, आर्थिक और वैचारिक रूपरेखा पेश करने का प्रयास भी था। लगभग 75 मिनट के भाषण में आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, तकनीक, महिला भागीदारी और राष्ट्रीय सुरक्षा को विकास की व्यापक परियोजना से जोड़ा गया। भाषण का केंद्रीय संदेश यह था कि स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने तक भारत को केवल आर्थिक रूप…

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आज भी जीवंत है सदियों पुरानी बिहुला-विषहरी की लोकगाथा

शिवशंकर सिंह पारिजात भारत की वाचिक परंपराओं का अपना विशिष्ट महत्व है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक लोक-कंठ के माध्यम से पहुंचने वाली लोकगाथा, लोककथा, लोकोक्ति, मिथक और कहावतें केवल मनोरंजन का साधन नहीं होतीं। इनमें समाज की स्मृतियां, आस्थाएं, संघर्ष और जीवन के अनुभव सुरक्षित रहते हैं। इन्हें अक्सर ऐतिहासिक दस्तावेज का दर्जा नहीं दिया जाता, लेकिन गहराई से देखने पर इनके भीतर इतिहास के अनेक संकेत मिलते हैं। अंगभूमि की ऐसी ही जीवंत लोकगाथा है बिहुला विषहरी। भागलपुर, मुंगेर, नवगछिया, सुलतानगंज, बांका और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों…

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जेन अल्फा के सवालों में घिरी मध्यप्रदेश की सत्ता

पवन वर्मा मध्यप्रदेश सरकार बड़े-बड़े इन्वेस्टमेंट समिट और ग्लोबल दावों में व्यस्त है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के नौनिहाल बुनियादी जरूरतों के लिए सड़क पर हैं। मध्यप्रदेश में सत्ता के सामने अब एक ऐसी पीढ़ी सवाल लेकर खड़ी हो रही है, जिसने अभी वोट देना भी शुरू नहीं किया है। जेन अल्फा के बच्चे स्कूल की सड़क, बस का किराया और स्कूल की जगह जैसे मुद्दों पर सड़क पर उतर रहे हैं। 15 अगस्त को छतरपुर के चंदला में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोक…

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मोल की दुल्हन पर चुप्पी, लव मैरिज पर पंचायत

डॉ. सत्यवान सौरभ हरियाणा के जींद जिले में नौगामा खाप की महापंचायत द्वारा प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के 21 गांवों में प्रवेश पर रोक लगाने संबंधी कथित निर्णय ने एक बार फिर उस बहस को जीवित कर दिया है, जो समय-समय पर भारतीय समाज के सामने खड़ी होती रही है—क्या सामाजिक परंपराएं किसी बालिग नागरिक के संवैधानिक अधिकारों से ऊपर हो सकती हैं? यह विवाद केवल एक पंचायत या एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते भारतीय समाज, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक संरचनाओं के बीच संतुलन की चुनौती…

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परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया अब सपना नहीं, समय की मांग

डॉ. शैलेश शुक्ला 9 अगस्त 1945 मानव इतिहास की उन तारीखों में से है जिन्हें केवल कैलेंडर पर दर्ज घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह वह दिन था जब विज्ञान की अभूतपूर्व शक्ति ने मानव सभ्यता के सामने अपनी सबसे भयावह संभावनाओं में से एक को प्रकट किया। सुबह 11 बजकर 2 मिनट पर अमेरिकी बी-29 विमान बॉकस्कार ने नागासाकी पर प्लूटोनियम आधारित परमाणु बम गिराया। बम का नाम फैट मैन था। नागासाकी उस समय जापान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और बंदरगाह नगर था। 6 अगस्त को…

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