फूहड़ शब्दों का ग्लैमर और वर्चुअल समाज की विडंबना सोशल मीडिया पर अब केवल तस्वीरें या वीडियो नहीं, शब्द भी बिकने लगे हैं। फूहड़ता और अपशब्दों ने अभिव्यक्ति की मर्यादा को पीछे छोड़ दिया है। लाइक, कमेंट और शेयर की भूख ने भाषा को बाजार में बदल दिया है। समाज का वही वर्ग जो संस्कारों की बातें करता है, वही इन पोस्टों पर तालियाँ बजाता है। यह प्रवृत्ति केवल भाषा का पतन नहीं, सोच की गिरावट भी है। सभ्यता की पहली पहचान भाषा होती है—जब भाषा गिरती है, तो समाज…
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