डॉ. विवेकानंद उपाध्याय स्तंभकार हर साल 9 सितंबर आते ही हिंदी साहित्य अपने पितामह के दरवाजे पर सिर झुकाता है। काशी की एक तंग गली, एक हवेली और उस हवेली में जन्मा एक बालक — जिसने कुल 34 साल और 4 महीने के जीवन में वह कर दिखाया, जिसे करने में सदियों लग जाती हैं। वह बालक था हरिश्चंद्र, जिसे दुनिया ने बाद में ‘भारतेन्दु’ कहा, यानी भारत का चंद्रमा। 1850 का भारत, गुलामी का अंधेरा, अंग्रेजी हुकूमत की धाक, और ऐसे में एक किशोर का यह संकल्प लेना कि…
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