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अवंती बाई लोधी ने मातृभूमि की रक्षा के लिए दे दी प्राणाहुति – चंद्रभूषण सिंह यादव
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वक्त गोंड राजा शंकर शाह की अध्यक्षता में आयोजित विशाल सम्मेलन के आयोजन हेतु प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी रामगढ़ की रानी अवंतीबाई लोधी को मिली।अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए रानी ने पड़ोसी राज्यों के राजाओं और जमींदारों को पत्र के साथ कांच की चूड़ियां भेजीं और पत्र में लिखा कि “मातृभूमि की रक्षा के लिए या तो कमर कस लो या फिर कांच की चूड़ियां पहनकर घर बैठ जाओ।”जिसने भी यह संदेश पढ़ा वह देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने को तैयार हो गया,उक्त बातें रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत डुमरी स्थित सपा जनसंपर्क कार्यालय पर आयोजित अवंती बाई लोधी शहादत दिवस कार्यक्रम में व्यक्त करते हुए सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि रानी अवंती बाई लोधी के आह्वान की गूंज दूर-दूर तक पहुंचने के बाद योजनानुसार आसपास के सभी राजा अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट हो गए। जब 1857 का विद्रोह शुरू हुआ तो अवंतीबाई लोधी ने 4000 की सेना खड़ी की और उसका नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों के साथ पहली लड़ाई मंडला के पास खैरी गाँव में 23 नवंबर 1857 को लड़ी, जहाँ वह और उनकी सेना ब्रिटिश डिप्टी कमिश्नर वाडिंगटन और उसकी सेना को इस कदर हराने में सफल रहीं कि अंग्रेजों को मंडला छोड़कर भागना पड़ा। सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि अवंती बाई लोधी के हाथों हुई पराजय से आहत अंग्रेज रीवा के राजा की मदद से प्रतिशोध की भावना से वापस आए और रामगढ़ पर हमला कर दिये। अवंती बाई लोधी सुरक्षा के लिए देव हरिगढ़ की पहाड़ियों में चली गईं।अवंती बाई लोधी ने ब्रिटिश सेना को रोकने के लिए गुरिल्ला युद्ध का सहारा लिया, हालाँकि युद्ध में लगभग निश्चित हार को सामने देख उन्होंने 20 मार्च 1858 को अपनी तलवार से खुद को मारकर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी जिन्हें कृतज्ञ राष्ट्र उनके शहादत दिवस पर नमन करता है। अवंती बाई लोधी को नमन करने वाले प्रमुख सपाईयों में मुरलीधर,सुरेश नारायण सिंह,दयानंद यादव, अशोक यादव, कृष्णा यादव,अयोध्या वर्मा,संतोष मद्धेशिया,नाजिर अंसारी, नगीना यादव, उत्तिम यादव,श्यामराज कन्नौजिया, अभिषेक गुड्डू गोंड आदि के नाम प्रमुख हैं।
