बारा/नौढिया, प्रयागराज। देश की आज़ादी के 77 वें अमृत महोत्सव पर जब पूरा भारत तिरंगे की शान में सराबोर था, यमुनापार क्षेत्र के शंकरगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा नौढिया तरहार से एक ऐसी घटना सामने आई जिसने हर देशभक्त का दिल दहला दिया। स्वतंत्रता दिवस के दिन प्राथमिक विद्यालय परिसर में बने शौचालय की छत पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया गया। इस नज़ारे ने गाँव में आक्रोश की आग भड़का दी। ग्रामीणों का कहना है कि यह न केवल राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है बल्कि शहीदों की कुर्बानी का भी खुला मज़ाक है। ग्रामवासियों ने स्पष्ट आरोप लगाया कि इस पूरे आयोजन में विद्यालय के शिक्षक और ग्राम प्रधान मौजूद थे। फिर भी शिक्षकों ने इस शर्मनाक कृत्य को रोकने के बजाय खुद इसे अंजाम दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जिन पर बच्चों को देश का सम्मान सिखाने की जिम्मेदारी है, वे खुद ही तिरंगे के अपमान में शामिल पाए गए। यह शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाली घटना है। गाँव के बुजुर्गों ने गुस्से में कहा कि शिक्षक समाज का मार्गदर्शक होता है, लेकिन यहाँ तो मार्गदर्शक ही भटक गए। युवाओं ने सवाल उठाया कि जब शिक्षक ही ध्वज संहिता का सम्मान नहीं करेंगे तो बच्चों में देशप्रेम की भावना कैसे पनपेगी। ग्रामीणों ने कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सोच और जिम्मेदारी दोनों का दिवालियापन है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का कृत्य राष्ट्रीय ध्वज संहिता 2002 और भारतीय दंड संहिता की धाराओं का गंभीर उल्लंघन है। इसमें दोषियों पर जुर्माना, जेल की सजा और गंभीर मामलों में देशद्रोह तक का मुकदमा दर्ज हो सकता है। यह अपराध किसी भी सूरत में मामूली नहीं माना जा सकता।ग्रामीणों की मांग है कि दोषी शिक्षकों को तत्काल निलंबित किया जाए। उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्यवाही भी की जाए, ताकि भविष्य में कोई शिक्षक या विद्यालय ध्वज का इस तरह अपमान करने की जुर्रत न कर सके। शिक्षा विभाग को इस घटना के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए और पूरे जनपद के विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश देने चाहिए कि ध्वज संहिता का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। तिरंगा केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की अस्मिता, शौर्य और बलिदान का प्रतीक है। इसके अपमान को हल्के में लेना पूरे देश का अपमान है। ग्राम सभा नौढिया तरहार में हुई यह घटना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि शिक्षा की मूल आत्मा और देशभक्ति के आदर्श पर भी गहरी चोट है। दोषियों को सख्त सजा देकर ही शहीदों की कुर्बानी का सम्मान और आने वाली पीढ़ियों को सही संदेश दिया जा सकता है।
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