नाम है अपनी दुकान।’ सर्वप्रथम इस दुकान का उद्घाटन प्राचार्य राजेंद्र प्रताप द्वारा कर दुकान से शैक्षिक सामग्री क्रय कर उसकी राशि को बॉक्स में डाला गया और दुकान किस प्रकार से व्यवस्थित एवं सृजित किया जाए पर चर्चा परिचर्चा की गई , जिसमें समस्त डीएलएड प्रशिक्षु एवं संस्थान के समस्त प्रवक्ता प्रतिभाग किए । इसके उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए प्राचार्य राजेंद्र प्रताप ने अपने संबोधन में बताया की इस दुकान का उद्देश्य प्रशिक्षुओं में नैतिक मूल्य, आत्म नियंत्रण और सामाजिक जिम्मेदारी के व्यवहार का विकास करना है ताकि उनमें सामाजिकता नैतिकता आदर्शवादिता इत्यादि मूल्य का विकास हो सके साथ ही साथ वे आने वाली जिम्मेदारियो से संबंधित कठिनाइयों का समाधान स्वयं कर सकें । सर ने कहा कि इसके प्रमुख बिंदु द्वारा कुछ प्रवक्ताओं और प्रशिक्षुओं को मिलाकर एक मुख्य समिति बनाई जाएगी जो दुकान का आयोजन करेगी ।यह कार्य प्रत्येक दिवस सुबह कार्य दिवस शुरू होने से पहले या दिन के अंत में बिना किसी घोषणा के लगाई जाएगी ।एक मूल्य निर्धारित वस्तुओं (स्टेशनरी स्नेक्स आदि रेट लिस्ट के साथ) एक स्थान पर अथवा पास में बॉक्स रखा जाएगा जिसमें राशि डाली जा सके ।कोई निगरानी नहीं होगी और आयोजन की जानकारी बाकी प्रशिक्षुओं या स्टाफ को नहीं दी जाएगी ।इसमें प्रत्येक दिन समिति एक संक्षिप्त अवलोकन नोट बनाएगी ।अंतिम दिन संयुक्त रिफ्लेक्शन सर्कल आयोजित की जाएगी जिसमें आयोजन की वास्तविकता को साझा कर अनुभवों पर प्रशिक्षुओं की प्रक्रियाएं ली जाएगी । विश्वाश ,ईमानदारी जैसे मूल व्यवहार में प्रशिक्षु कैसे दिखते है? की एक रिपोर्ट का निर्माण किया जाएगा ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के निहित सिद्धांतों के अनुसार प्रशिक्षकों की सर्वांगीण पक्ष को समृद्ध किया जा सके। इस कार्यक्रम के रूपरेखा निर्माण में संस्थान की प्रवक्ता निधि मिश्रा वर्तिका कुशवाहा ऋचा राय सुरभि सिंह,अमित सिंह ,वीरभद्र प्रताप ,विवेक त्रिपाठी सहित समस्त प्रशिक्षण डीएलएड प्रशिक्षुओं ने रुचि तथा आनंद से सराहनीय योगदान दिया।
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