दरअसल, 14 जून की रात को कुछ इमरजेंसी के कारण रॉयल नेवी का उड़ता हथियार एफ-35 बी स्टील्थ फाइटर जेट को भारत में लैंड कराया गया। आपको बता दें कि ये वहीं लड़ाकू विमान है जिसे अमेरिका ने तैयार किया है और वो भारत को लगातार इसी की पेशकश कर रहा है। लेकिन सच्चाई ये है कि ये विमान पिछले 13 दिनों से भारत में जमीन पर खड़ा है। वैसे इस विमान को लेकर बड़े बड़े दावे किए जाते हैं। एक दावा तो ये भी है कि ये रडार में नहीं आता। लेकिन इमरजेंसी में जब इसे भारत में लैंड करना पड़ा तो भारतीय वायुसेना के आईएसीसीएस प्रणाली ने न केवल इसे ट्रैक किया बल्कि लैंडिंग से लेकर टेक्निकल सपोर्ट तक हर स्तर पर तेजी से मदद भी पहुंचाई।
ये कहीं न कहीं भारतीय वायुसेना सुरक्षा प्रणाली की ताकत को दिखाता है। इसके साथ ही इससे ये भी सवाल उठता है कि क्या एस 35 उतना खतरनाक है, जितना अमेरिका इसको लेकर दावा करता है। अब खबर है कि तिरुवंतपुरम के हवाई अड्डे के बे-4 में जो ब्रिटिश फाइटर जेट पार्कड है उसे उसके लिए पार्किग शुल्क अदा करनी पड़ेगी। मीडिया रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से लिखा जा रहा है कि ब्रिटिश अधिकारियों को ग्राउंडेड विमान के लिए पार्किंग शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा क्योंकि जिस जगह पर ये लड़ाकू विमान खड़ा है वो बे-4 है। ये हावई अड्डे का बे-4 वीआईपी विमानों के लिए आरक्षित स्लॉट है।
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