वीरता का इतिहास है रानी दुर्गावती का जीवन -चंद्रभूषण सिंह यादव

मध्यप्रदेश के आदिवासी राज्य गोंडवाना की रानी दुर्गावती का जीवन वीरता का सुनहरा इतिहास है जिन्होंने अपने पति दलपत शाह की मृत्यु के बाद 05 वर्षीय नाबालिग पुत्र वीर नारायण शाह की संरक्षिका बन 26 वर्ष की उम्र में गोंडवाना की राजसत्ता संभाल ली,उक्त उद्गार रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत डुमरी स्थित सपा जनसंपर्क कार्यालय पर आयोजित शहादत दिवस कार्यक्रम में व्यक्त करते हुए सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती महानतम वीरांगना थीं।
सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि 1562 में मुगल शासक अकबर द्वारा मालवा पर विजय प्राप्त कर लेने के बाद 1564 में आसफ खान के नेतृत्व में हुए मुगल आक्रमण का रानी दुर्गावती ने जमकर प्रतिकार किया लेकिन मुगल सेना के आधुनिक अस्त्र -शस्त्र के समक्ष अपनी सेना के पराजय के बाद स्वयं को मुगलों को समर्पित करने की बजाय रानी ने अपनी जीवन लीला स्वयं ही समाप्त कर बलिदान की एक अप्रतिम कहानी लिख डाली।
रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने वाले प्रमुख सपाईयों में अशोक यादव, राधेश्याम यादव, अयोध्या वर्मा, सुरेश नारायण सिंह,दयानंद यादव, संतोष मद्धेशिया, अभिषेक गोंड,नाजिर अंसारी, इसमुहम्मद अंसारी, तालिम अंसारी, श्रीकशुन धरकार आदि के नाम प्रमुख हैं।

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