जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में श्री राजेंद्र प्रसाद तिवारी उर्फ दुकान जी उपस्थित रहे उन्होंने पंडितों को नैष्ठिक बने रहने की प्रेरणा दी।साथ ही कृष्णा कम्प्यूटर संस्थान के निदेशक ब्रह्मानंद मिश्र जी ने संस्कृत सीखने आए जिज्ञासुओं का उत्साह वर्धन किया । स्वस्ति वाचन और सरस्वती वंदना करके संस्कृत सम्भाषण शिविर का प्रारम्भ किया गया। अध्यक्ष जी ने शिविर का उद्देश्य बताया कि हमारे सनातन संस्कृति को जानने के लिए वेदों पुराणों शास्त्रों तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों को जानने की आवश्यकता है जो कि ऋषियों द्वारा संस्कृत में लिखे गए हैं अतः संस्कृत भाषा का ज्ञान प्रत्येक सनातनी के लिए आवश्यक है जब तक संस्कृत का ज्ञान नहीं होगा तब तक हम अपने धर्म को नहीं जान सकते इसी उद्देश्य से श्री वेदांग संस्थान का यह प्रथम प्रयास है कि सब लोग सरल रूप से संस्कृत भाषा को सीखें और अपने को जाने विशेष रूप से संस्थान द्वारा कर्मकाण्ड पौरोहित्य कर्म करने वाले पंडितों के लिए यह शिविर संचालित किया गया है क्योंकि पूजा पाठ का माध्यम संस्कृत भाषा है यदि संस्कृत का ज्ञान नहीं होगा तो अच्छी तरह कर्मकाण्ड कराना संभव नहीं है और गलत तरीके से किया गया कर्मकाण्ड स्वयं पंडित के लिए और यजमान के लिए भी घातक होता है।अतः हमारा प्रयास है कि यज्ञ अनुष्ठान संस्कृत के माध्यम से तो होते ही हैं उस मध्य पंडित लोग आपस में बोलचाल में भी संस्कृत भाषा का प्रयोग करें।यह कार्यक्रम डा राममिलन मिश्र (अध्यक्ष -श्री वेदांग संस्थान)की अध्यक्षता में हो रहा है। जिसमें एक सप्ताह प्रतिदिन सायंकाल ५बजे से ७:३०बजे तक संस्कृत शिक्षक के रूप में श्री ओम प्रकाश द्विवेदी जी बड़े ही सरल और सहज ढंग से संस्कृत प्रेमियों को संस्कृत बोलना सिखा रहे हैं। संस्कृत सम्भाषण सीखने के लिए किसी प्रकार का जाति ,आयु या योग्यता का बंधन नहीं है कोई भी शिविर में समय से आकर संस्कृत सीख सकता है। संस्थान द्वारा शिविर में सहभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा ।
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