एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पार्टी पर जीत सुनिश्चित करने के लिए फर्जी चुनाव कराने का आरोप लगाया। गांधी के आरोपों में फर्जी मतदाताओं को जोड़ने, मतदान प्रतिशत बढ़ाने, फर्जी मतदान की सुविधा देने और सबूत छिपाने सहित कई कथित अनियमितताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इस तरह की प्रथाएं बिहार जैसे अन्य राज्यों में भी फैलेंगी, जहां आगामी चुनावों में भाजपा को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। गांधी ने कहा कि चुनाव कैसे चुराया जाए? 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लोकतंत्र में धांधली का खाका है। उन्होंने एक कथित चरण-दर-चरण प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की, जिसकी शुरुआत चुनाव आयोग की नियुक्ति के लिए पैनल में धांधली से होती है और धोखाधड़ी के सबूत छिपाने के साथ समाप्त होती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि धोखेबाज जीत सकते हैं, लेकिन इस तरह की प्रथाएं लोकतंत्र को कमजोर करेंगी और संस्थानों में जनता का भरोसा खत्म करेंगी।
चुनाव आयोग ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए गांधी के दावों को बेतुका और भ्रामक बताया। एक बयान में ईसीआई ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की चिंताओं पर उसका विस्तृत जवाब दिसंबर 2024 से ईसीआई की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि बिना सबूत के आरोप न केवल कानून का अपमान करते हैं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अथक परिश्रम करने वाले चुनाव कर्मचारियों का मनोबल भी गिराते हैं। ईसीआई ने कहा कि किसी के द्वारा फैलाई गई कोई भी गलत सूचना न केवल कानून के प्रति अनादर का संकेत है, बल्कि उनके राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त हजारों प्रतिनिधियों की बदनामी भी करती है और लाखों चुनाव कर्मचारियों का मनोबल भी गिराती है।
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