DGMO कैसे बनते हैं?
डीजीएमओ बनने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार को भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में NDA, CDS या अन्य रक्षा प्रवेश परीक्षाओं के जरिए प्रवेश लेना होता है। इसके बाद लंबे सैन्य करियर, रणनीतिक निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व कौशल और विशेष सैन्य प्रशिक्षण के आधार पर अधिकारी को प्रमोशन के माध्यम से लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचना होता है।
डीजीएमओ की नियुक्ति रक्षा मंत्रालय और सेना प्रमुख द्वारा की जाती है और यह पूरी प्रक्रिया अत्यधिक चयनात्मक और प्रतिस्पर्धी होती है। केवल वे अधिकारी जो अपनी सेवाओं में असाधारण प्रदर्शन करते हैं, उन्हें इस प्रतिष्ठित पद के लिए चुना जाता है।
DGMO की जिम्मेदारियां क्या होती हैं?
डीजीएमओ का मुख्य कार्य भारतीय सेना के सैन्य अभियानों की योजना बनाना और उन्हें क्रियान्वित करना होता है। इसके अलावा ये अधिकारी नियंत्रण रेखा (LOC) पर तनाव कम करने, गोलीबारी रोकने, सैन्य खुफिया जानकारी का विश्लेषण करने और सेना को उच्चतम स्तर की तैयारी में बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं।
DGMO की सैलरी कितनी होती है?
डीजीएमओ, जो कि लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का अधिकारी होता है, को 7वें वेतन आयोग के अनुसार बेसिक वेतन 1,82,200 रुपये से 2,24,100 रुपये प्रतिमाह मिलता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के भत्ते, जैसे कि मकान, मेडिकल, परिवहन और उच्च जोखिम भत्ते मिलते हैं। कुल मिलाकर DGMO की मासिक सैलरी 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक हो सकती है।
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