उन्होंने कहा, “जब हम एआई का उपयोग करते हैं तो डीपीआई की शक्ति वास्तव में 10, 20 या 100 गुना हो सकती है।” मंत्री ने कहा कि यदि चीन ‘डीपसीक’ आधारभूत एआई मॉडल बना सकता है, तो कोई कारण नहीं है कि भारत जैसा देश, जिसने चंद्रमा तक पहुंचने के लिए किफायती नवोन्मेष किया है, कम लागत पर ऐसा ही मॉडल क्यों न बना सके।
उन्होंने कहा कि अपना स्वयं का वृहद मॉडल बनाने के लिए सरकार द्वारा प्रवर्तित योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने भारत के स्टार्टअप द्वारा अपना मॉडल विकसित करने में विश्वास भी जताया। वैष्णव ने कहा कि भारत यूरोपीय देशों की तरह कठोर रुख अपनाने के बजाय विनियमन के लिए प्रौद्योगिकी-कानूनी दृष्टिकोण अपना रहा है। मंत्री ने कहा कि जापान ने भारत में विकसित एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) को पेटेंट दिया है।
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