इसका मकसद निवेशकों, खरीदारों और उद्यमियों के बीच सीधी बातचीत तथा व्यावसायिक साझेदारियों को बढ़ावा देना है। उप्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। बयान के अनुसार व्यापार प्रदर्शनी में देश-विदेश से आने वाले उद्यमियों, निवेशकों और आगंतुकों को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं, शास्त्रीय संगीत और परंपराओं से रूबरू होने का मौका मिलेगा।
सूचना विभाग के मुताबिक कार्यक्रमों की शुरुआत 25 सितंबर को शंख वादन, वैदिक मंगलाचरण और चेतन जोशी के वाद्य संगीत, अलोकनिशा श्रीवास्तव के कथक तथा ढेढ़िया लोक नृत्य के साथ होगी। दूसरे दिन 26 सितंबर को दिल्ली के पं. रविशंकर उपाध्याय और पं. ऋषि शंकर उपाध्याय का पखावज युगल वादन, भोजपुरी लोक गायन, कथक और मथुरा का लोक नृत्य मुख्य आकर्षण होंगे। इसके बाद 27 सितंबर को सैक्सोफोन वादन, झांसी का राई लोक नृत्य व भरतनाट्यम तथा 28 सितंबर को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का प्रदर्शन, महोबा का आल्हा गायन, पीलीभीत का थारू जनजातीय नृत्य और सूफी नाइट आयोजित की जाएगी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन 29 सितंबर को वाराणसी के पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्रा के सितार वादन और कमाल खान के गजल गायन के साथ होगा।
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