वहीं, नकली नोट छापने या उसे सर्कुलेट करने पर भी सजा का प्रावधान है, जिसमें 10 साल तक की जेल और जुर्माना शामिल हो सकता है। जबकि नकली नोटों के लिए उपकरण या सामग्री बनाने या रखने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है। ऐसे में अगर आपको गलती से नकली नोट मिल जाए, तो इसे छिपाने या किसी को धोखा देने की कोशिश करने के बजाय RBI के निकटतम जारी करने वाले कार्यालय या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करना सबसे अच्छा है। इसके अलावा, असली और नकली नोटों में अंतर करने के लिए आरबीआई द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें।
आपको पता होना चाहिए कि किसी भी देश की नकली करेंसी उस देश की अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह अंदरुनी तौर पर खोखला कर देती है। लिहाजा, इससे देश की वित्तीय प्रणाली को भारी नुकसान होता है। यही वजह है कि जाने-अनजाने में भी इसका इस्तेमाल करने पर न्यूनतम जेल की सजा भी मिल सकती है। आपको यह मालूम होना चाहिए कि नकली नोट से देश को बचाने के लिए इस मामले में सख्त जांच होती है। इसके साथ ही कठोर से कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा भी दी जाती है।
यदि आपको पता है कि आपके पास जो नोट है, वो जाली यानी नकली है और इसके बावजूद भी आप उसे सर्कुलेट करते हैं, तो फिर आपके खिलाफ सख्त प्रशासनिक व पुलिसिया कार्रवाई हो सकती है। क्योंकि यह कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसा करने पर अधिकतम 7 साल की सजा भी हो सकती है। इसलिए अविलंब आरबीआई को सूचित कीजिए और अपनी क्षतिपूर्ति का क्लेम कीजिए।
जान लीजिए कि भारतीय नोट के वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड, माइक्रोलेटिंग और आरबीआई द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों की जांच करके आप असली और नकली नोट के बीच आसानी पूर्वक फर्क पहचान सकते हैं। इसलिए नोट पर लाइट के पास जाकर महात्मा गांधी की तस्वीर को चेक करें। नोट के अंदर लगी चौड़ी पट्टी पर आरबीआई का वॉटरमार्क देखें।
इससे एक बात साफ हो चली है कि रुपए-पैसे कमाने के लिए आज के दौर में हर कोई खूब संघर्ष और मेहनत करता है। लेकिन यदि गलती से भी आपके पास नकली यानी जाली नोट आ जाता है और यदि आप उसका इस्तेमाल बाजार में करते हैं, तो ये आपके लिए भारी मुसीबत का कारण बन सकता है। क्योंकि जाली/नकली नोट का इस्तेमाल करना कानूनन जुर्म है।
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