
इस मेगा श्रमदान के माध्यम से रेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने संदेश दिया कि स्वच्छता केवल सरकारी विभागों अथवा सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक एवं कर्मचारी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सामूहिक श्रमदान से न केवल रेलवे परिसर में स्वच्छता सुनिश्चित होती है, वरन् लोगों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी, सहभागिता एवं स्वामित्व की भावना भी विकसित होती है। ‘स्वच्छता ही सेवा‘ अभियान के माध्यम से रेलवे परिसरों में स्वच्छता के साथ-साथ रिड्यूस, रीयूज़ एवं रीसाइकल की अवधारणा को बढ़ावा देने, कचरे के उचित निस्तारण तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे का यह प्रयास है कि ‘स्वच्छता ही सेवा‘ अभियान को केवल एक निर्धारित अवधि तक सीमित न रखते हुये स्वच्छता को नियमित कार्यप्रणाली, व्यवहार एवं जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाये।
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन की आमजन से अपील है कि वे रेलवे स्टेशनों, रेलवे परिसरों, सार्वजनिक स्थलों, पर्यटन स्थलों एवं ऐतिहासिक धरोहरों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाये रखने में सक्रिय सहयोग प्रदान करें, कूड़ा निर्धारित स्थान पर ही डालें, प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग से बचें तथा स्वच्छता सम्बन्धी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लें। सामूहिक सहभागिता से ही ‘स्वच्छ रेलवे, स्वच्छ परिसर और स्वच्छ भारत‘ के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।
इसी प्रकार, वाराणसी, लखनऊ एवं इज्जतनगर मंडलों में भी ‘स्वच्छता ही सेवा‘ अभियान का व्यापक स्तर पर आयोजन किया जा रहा है।
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