आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. दीक्षा भावसार सावलिया, जो थायरॉइड, हार्मोन और फर्टिलिटी की विशेषज्ञ हैं, ने बताया कि सावन हमें अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी को थोड़ा धीमा करने, शरीर को आराम देने और मन को शांत रखने का संदेश देता है। उनके मुताबिक, यह महीना सिर्फ पूजा-पाठ करने का नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर स्वस्थ जीवन जीने का भी समय है।
सावन में शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
आयुर्वेद के अनुसार सावन का महीना वर्षा ऋतु में आता है। इस मौसम में हमारी पाचन शक्ति पहले की तुलना में कमजोर हो जाती है। शरीर में सुस्ती और भारीपन महसूस हो सकता है। साथ ही वात दोष बढ़ने लगता है और मन भी पहले से ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। डॉ. दीक्षा ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमेशा मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या और खान-पान बदला। सावन भी ऐसा ही समय है, जब हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलना चाहिए।
सावन में व्रत रखने का असली मतलब क्या है?
ज्यादातर लोग व्रत का मतलब सिर्फ खाना छोड़ देना समझते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार व्रत का उद्देश्य शरीर को भूखा रखना नहीं, बल्कि उसे आराम देना है। डॉ. दीक्षा ने बताया कि व्रत रखने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। इससे शरीर को भोजन पचाने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है। साथ ही मन शांत रहता है, आत्मसंयम बढ़ता है और खाने की गलत आदतों पर भी नियंत्रण आता है। जब शरीर हल्का महसूस करता है, तो मन भी ज्यादा शांत और एकाग्र रहता है।
सावन में भगवान शिव की पूजा क्यों की जाती है?
डॉ. दीक्षा के अनुसार, भगवान शिव सिर्फ एक देवता नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक संदेश भी हैं। शिव हमें शांत रहना, धैर्य रखना, कम बोलना, खुद को समझना और जीवन में बदलाव स्वीकार करना सिखाते हैं। सावन का महीना हमें इन गुणों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। इसलिए इस महीने का महत्व सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है।
सावन की परंपराओं के पीछे छिपे हैं सेहत के राज
डॉ. दीक्षा ने बताया कि सावन में निभाई जाने वाली कई परंपराओं का सीधा संबंध हमारी सेहत से भी है। दीपक जलाने से मन शांत होता है और ध्यान एक जगह लगता है। मंत्रों का जाप करने से सांसों की गति संतुलित होती है, जिससे तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। सात्विक और हल्का भोजन करने से पाचन तंत्र बेहतर रहता है और मन भी साफ और शांत महसूस करता है। वहीं सादगी भरी जीवनशैली अपनाने से मानसिक तनाव और अनावश्यक भागदौड़ कम होती है।
सावन सिर्फ शरीर नहीं, मन को भी साफ करने का समय है
आयुर्वेद के अनुसार डिटॉक्स का मतलब केवल शरीर की सफाई नहीं होता। यह मन और व्यवहार को भी बेहतर बनाने का समय है। डॉ. दीक्षा सलाह देती हैं कि सावन के दौरान नकारात्मक सोच से दूर रहने की कोशिश करें। गुस्से पर काबू रखें, ईर्ष्या और द्वेष जैसी भावनाओं को कम करें और दूसरों से प्यार और सम्मान के साथ बात करें। उनका मानना है कि स्वस्थ शरीर के साथ शांत मन भी उतना ही जरूरी है।
सावन में अपनाएं ये आसान आदतें
डॉ. दीक्षा के अनुसार, सावन में कुछ छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहा जा सकता है। खाना हमेशा आभार के साथ खाएं। सुबह थोड़ा जल्दी उठें। रोज कुछ मिनट शांति से बैठें। अच्छी और प्रेरणादायक किताबें पढ़ें। दूसरों के प्रति दया और करुणा का भाव रखें। पूजा केवल एक रस्म की तरह नहीं, बल्कि पूरे मन और श्रद्धा के साथ करें।
सिर्फ पूजा नहीं, जीवनशैली भी बदलें
डॉ. दीक्षा भावसार सावलिया ने कहा कि अगर सावन में सिर्फ पूजा करने के बजाय खान-पान, दिनचर्या और मानसिक संतुलन पर भी ध्यान दिया जाए, तो यह महीना शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। उनका मानना है कि जब अध्यात्म और आयुर्वेद साथ चलते हैं, तब हर अच्छी आदत धीरे-धीरे हमारे शरीर और मन को स्वस्थ बनाने का काम करती है। इसलिए इस सावन सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली में भी छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव जरूर करें।
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