पतंजलि ऋषिकुल में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन

प्रयागराज, 29 जुलाई। भारतीय संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन पतंजलि ऋषिकुल में श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में स्वराज विद्यापीठ, प्रयागराज के कुलगुरु प्रो. रामाचरण त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष श्री रवीन्द्र गुप्ता, उपाध्यक्षा डॉ. कृष्णा गुप्ता, निदेशिका श्रीमती रेखा बैद, सचिव श्री यशोवर्धन, प्रधानाचार्य श्री नित्यानंद सिंह, शिक्षकगण, अभिभावक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। स्वागत उद्बोधन में प्रधानाचार्य श्री नित्यानंद सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान एवं कृतज्ञता का भाव रखते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि प्रो. रामाचरण त्रिपाठी ने कहा कि सच्ची शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मचिंतन, अनुशासन, आत्मसंयम एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
विद्यार्थियों ने ‘गुरु चरण कमल वंदन’ समूहगान, ‘गुरु कथा’ पर आधारित पंडवानी शैली के नाट्य मंचन, ‘श्री गुरु स्तोत्रम्’ के श्लोक-पाठ तथा ‘चरण शीश नमः’ नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। एकलव्य की गुरु-भक्ति पर आधारित प्रस्तुति पंडवानी की प्रख्यात लोकगायिका तीजन बाई की स्मृति को समर्पित रही।
विद्यालय में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए विभिन्न रचनात्मक एवं मूल्यपरक गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। कमल एवं सूर्य निर्माण, ज्ञान दीप, वैल्यू व्हील, रोल मॉडल बैज, प्रॉमिस वॉल तथा अन्य गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
विद्यालय के अध्यक्ष श्री रवीन्द्र गुप्ता एवं उपाध्यक्षा डॉ. कृष्णा गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि गुरु का सान्निध्य जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। वहीं निदेशिका श्रीमती रेखा बैद एवं सचिव श्री यशोवर्धन ने कहा कि गुरु पूर्णिमा ज्ञान, संस्कार एवं जीवन-मूल्यों के प्रति समर्पण का उत्सव है और ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम का समापन गुरु वंदना एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
यह संस्करण लगभग 450–550 शब्दों का है और दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, जनसंदेश टाइम्स जैसे समाचार-पत्रों में प्रकाशन के लिए उपयुक्त शैली में तैयार किया गया है।

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