संसाधनों के सदुपयोग से नवाचार
यह परियोजना इंजीनियरिंग दक्षता और उपलब्ध संसाधनों के पुन: उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। नई सामग्री खरीदने के बजाय, CMLR टीम ने रेलवे के पुराने संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया:
• मॉड्यूलर यूनिट: एक पुराने एलएचबी कोच से निकाली गई मॉड्यूलर टॉयलेट यूनिट का उपयोग किया गया ।
• इको-फ्रेंडली सिस्टम: स्वच्छ अपशिष्ट प्रसंस्करण सुनिश्चित करने के लिए एनारोबिक बैक्टीरिया वाले बायो-टैंक को इससे जोड़ा गया ।
• स्वतंत्र जल आपूर्ति: जल आपूर्ति के लिए 455 लीटर क्षमता वाला पुराना ओवरहेड वाटर टैंक और सबमर्सिबल मोटर लगाई गई ।
• कस्टम इंजीनियरिंग: मॉड्यूलर टॉयलेट और टैंक को सहारा देने के लिए कोच मिडलाइफ रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप के बॉडी रिपेयर शॉप द्वारा एक विशेष धातु संरचना तैयार की गई ।
दो दिनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य
मुख्य कारखाना प्रबंधक/ कोच मिडलाइफ रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप, श्री ब्रिजेश कुमार पाण्डेय, ने इस पूरे कार्य को मात्र दो दिनों के भीतर पूरा करने का एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था ।
श्री जितेंद्र कुमार शर्मा/ सहायक कारखाना प्रबंधक के नेतृत्व में गठित टीम, जिसमें सुपरवाइजर श्री प्रशांत कुमार और श्री धीरज साहू शामिल थे, ने प्रभावी योजना और आपसी सहयोग से इस “लगभग असंभव” कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया ।
भविष्य की राह
माताटीला स्टेशन पर स्थापित यह मॉड्यूलर टॉयलेट यात्रियों की सुविधा को काफी हद तक बढ़ाएगा । यह पायलट प्रोजेक्ट अन्य चिन्हित स्टेशनों पर इसी तरह की सुविधाओं
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