अमेरिका ने भारत से आने वाले कई सामानों पर फिलहाल कुल मिलाकर 50% तक का टेरिफ लगा रखा है। इसमें से करीब 25% सामान्य टेरिफ है जो भारत के लगभग 55% निर्यात पर लागू होता है। इसके अलावा अगस्त 2025 से एक अतिरिक्त 25% ऑयल से जुड़ा पेनल्टी टेरिफ लगाया गया जो रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दबाव बनाने के लिए है। रूस के तेल को लेकर अमेरिका G7 और यूरोपीय देशों ने एक प्राइस कैप सिस्टम भी लागू किया है। जनवरी 2026 तक यह कैप लगभग 47.7 प्रति बैरल है। जिसे 1 फरवरी 2026 से घटाकर 44.10 किया जाएगा।
नियम यह है कि अगर रूसी तेल तय कीमत से ऊपर बेचा गया तो उस पर बीमा, शिपिंग और फाइनेंस जैसी सेवाएं नहीं दी जाएंगी। उधर अमेरिका का दावा है कि इस दबाव के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है। वहीं भारत का कहना है कि अपनी ऊर्जा, जरूरतें, राष्ट्रीय हित और किफायती दामों के आधार पर तय करता है। भारत साफ कर चुका है कि वो किसी के दबाव में आकर कोई कदम नहीं उठाएगा।
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