एक अलग घटना में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को आरोप लगाया कि बीसी जिंदल समूह की कंपनियों और उसके प्रवर्तकों ने ‘‘फर्जी लेनदेन’’ के जरिये करीब 505 करोड़ रुपये भारत से बाहर भेजे। केंद्रीय एजेंसी ने दिल्ली स्थित बिजली क्षेत्र के प्रमुख कारोबारी समूह, प्रवर्तक श्याम सुंदर जिंदल, उसके निदेशकों और अन्य पदाधिकारियों के कुल 13 परिसरों पर 18-19 सितंबर के दौरान विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के तहत छापेमारी की थी। कंपनी या उसके प्रवर्तकों से टिप्पणी के लिए तुरंत संपर्क नहीं किया जा सका।
एजेंसी ने एक बयान में दावा किया कि बी सी जिंदल समूह की इकाइयों, खासकर जिंदल इंडिया थर्मल पावर लिमिटेड (जेआईटीपीएल), जिंदल इंडिया पावरटेक लिमिटेड और जिंदल पॉली फिल्म्स लिमिटेड द्वारा विदेशी निवेश और अपनी विदेशी संस्थाओं में धन छुपाकर रखने तथा ‘राउंड ट्रिपिंग’ (धनराशि को इधर से उधर भेजने) के लिए फेमा के संदिग्ध उल्लंघन के लिए यह छापेमारी की गई।
स समूह का लाभकारी स्वामित्व श्याम सुंदर जिंदल, उनकी पत्नी शुभद्रा जिंदल और पुत्र भावेश जिंदल के पास है। जांच एजेंसी ने कहा कि तीनों पर ईडी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने एक अन्य विदेशी संस्था गार्नेट एंटरप्राइज डीएमसीसी (जीईडी) की शेयरधारिता हासिल करने के लिए भारत से बाहर अपनी विदेशी संस्था टोपाज एंटरप्राइज डीएमसीसी, दुबई को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (ओडीआई) की आड़ में 505.14 करोड़ रुपये भेजे।
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