”परम्परागत अशुद्ध शब्द-प्रयोग के प्रति मोह त्यागना होगा”– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

प्रयागराज। सी० एम० पी० डिग्री कॉलेज, प्रयागराज के हिन्दी-विभाग की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय भाषिक कर्मशाला के तीसरे और अन्तिम दिन व्याकरणवेत्ता और भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कहा, “उच्चारण और लेखन करते समय शुद्ध शब्दोँ का ही चयन करना चाहिए; क्योँकि किसी अभिव्यक्ति को भाषासम्पन्न करने के लिए संस्कृत और हिन्दी-भाषा के व्याकरण का ज्ञान होना अनिवार्य है। परम्परा से प्रयुक्त हो रहे सारे शब्द ग्रहणीय हैँ, ऐसा भी नहीँ है। हमे यदि लगता हो कि अमुक-अमुक शब्दोँ के व्यवहार से हम उच्चारण और लेखनस्तर पर स्खलन की ओर जा रहे हैँ तो उन परम्परागत अशुद्ध शब्दोँ के प्रति मोह का त्याग कर देना चाहिए। उनके स्थान पर सार्थक और उपयुक्त शब्दोँ को ग्रहण करना चाहिए।”
आचार्य ने अपनी कर्मशाला के अन्तिम दिन छात्र-छात्राओँ और अध्यापक-अध्यापिकाओँ को सिँहावलोकन का अर्थ सुस्पष्ट करते हुए, पिछले दो दिनो की कर्मशालाओँ मे बताये गये विषयोँ-उपविषयोँ की पुनरावृत्ति करते हुए, पूर्वाग्रह-पूर्वग्रह, निन्दा-भर्त्सना-आलोचना, चमत्कारिक-चामत्कारिक, वीभत्स-बीभत्स, सृष्टा-स्रष्टा, दृष्टा-द्रष्टा, सहस्त्र-सहस्र, संग्रहित-संगृहीत, जागृत-जाग्रत् अनुग्रहित-अनुगृहीत, गुरूजी-गुरुजी-गुरु जी, देवियों और सज्जनों-सज्जन, विद्वत् जनो-विद्वतजन-विद्वज्जन
आद्यान्त-आद्यन्त-आद्योपान्त नि:शुल्क-निश्शुल्क, वृहद्-बृहद्, बिरंगा-विरंगा, निरपराधी-निरपराध, निर्दयी-निर्दय, हवाएँ-हवा, सैन्यसमूह-सेना, उपरोक्त-उपर्युक्त, दिन-प्रतिदिन-प्रतिदिन, पूज्यनीय-पूज्य-पूजनीय, प्रफुल्लित-प्रफुल्ल, हतोत्साहित-हतोत्साह, मेरी इच्छानुसार-मेरे इच्छानुसार आदिक शताधिक शब्दोँ मे से कौन-सा शब्द अशुद्ध है और कौन-सा शुद्ध, कारणसहित बोध कराया।
आचार्य ने बताया कि हवा हमेशा चलती है, जबकि पानी बहता है। नदी नहीँ बहती, जबकि उसका जल बहता है। किस क्रिया मे ‘है’ लगेगा और किसमे हैँ, उन्होँने इसे समझाते हुए बताया कि इनकी पहचान करने के लिए कर्त्ता और कर्म के वचन को समझना होगा। ‘मैने कहानियाँ लिखीँ।’– इस वाक्य मे कर्त्ता (मै) तो एक वचन का है; परन्तु कर्म ‘कहानियाँ’ बहुवचन का है, इसलिए क्रिया बहुवचन (लिखीँ) की होगी।
कर्मशाला के अन्तिम चरण मे भाषाविशेषज्ञ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय को हिन्दी-विभाग की ओर से स्मृतिचिह्न भेँट किया गया। इस अवसर पर प्रो० सरोज सिंह, प्रो० आभा चतुर्वेदी, प्रो० दीनानाथ, डॉ० जी० गणेशन् मिश्र, डॉ० रंजीत, डॉ० प्रेमशंकर,डॉ० रमाशंकर, डॉ० राजेन्द्र यादव, डॉ० रामानुज, डॉ० भारती कोरी, डॉ० पूजा, डॉ० प्रियंका इत्यादिक उपस्थित थे।

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