गोस्वामी तुलसीदास जी भगवान शंकर के श्रृंगार का वर्णन कर रहे हैं। जिसमें हमने अभी तक अनेकों प्रकार के श्रृंगारों का रसास्वादन किया। गोस्वामी जी कहते हैं- ‘गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला।।’ भगवान शंकर के दिव्य श्रृंगार में, अब वाले श्रृंगार ने तो मानों दाँतों तले अँगुलि दबाने को विवश कर दिया था। कारण कि भगवान शंकर ने अपनी छाती पर एक माला पहन रखी है। वह माला न तो कोई स्वर्ण धातु से बनी है, और न ही पुष्प इत्यादि की। जी…
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