भगवान शंकर के पावन श्रृंगार की गाथा किसी विरले भाग्यशाली को ही प्राप्त होती है। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, कि भोलेनाथ का श्रृंगार अब तक पूर्ण हुआ माना जा रहा था। बस एक सुंदर घोड़ी की विवस्था की जानी बाकी थी। क्योंकि संसार में सभी दूल्हे जब अपनी बारात लेकर निकलते हैं, तो घोड़ी पर ही सवार होकर निकलते हैं। किंतु दूर-दूर तक भी किसी ने घोड़ी की विवस्था नहीं की थी। यह देख एक शिवगण ने भोलेनाथ से प्रार्थना की, कि क्या वे पैदल ही हिमाचल की ओर…
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