*490 इलेक्ट्रिक इंजनों ने रोक लिया पाँच लाख टन कार्बन उत्सर्जन*
*बिजली के इंजन के प्रयोग से हर वर्ष हो सात करोड़ लीटर डीजल की बचत*
*एचओजी के प्रयोग से हुई 3260 किलो लीटर हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) की बचत*
*सौर ऊर्जा संयंत्र से किया कुल 118.7 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन*
उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के करीब 3294 किमी रेलमार्ग पर शत-प्रतिशत विद्युतीकरण हो गया है। इन रेलमार्गों पर लगभग संपूर्ण परिचालन बिजली के लोकोमोटिव से ही हो रहा है। इसके फलस्वरूप विद्युतीकृत रेलमार्गों पर चल रहे 490 इलेक्ट्रिक इंजनों के चलते हर वर्ष सात करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है। इसके साथ ही, डीजल इंजनों से होने वाले लगभग पाँच लाख टन कार्बन उत्सर्जन को भी इलेक्ट्रिक इंजनों के प्रयोग ने रोक दिया है। अब रेल लाइनों पर न तो गंदगी गिर रही है और न ही हवा में कार्बन डाई आक्साइड का मिश्रण हो रहा है। इसके फलस्वरूप पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ट्रेनों का समय पालन भी बेहतर हुआ है।
प्रयागराज मंडल में 1210 रूट किमी, झांसी मंडल में 1354 रूट किमी और आगरा मंडल में 730 रूट किमी रेलमार्ग का विद्युतीकरण किया गया। इसके साथ ही, उत्तर मध्य रेलवे के सभी मार्गों पर इलेक्ट्रिक इंजनों का संचालन आरंभ हो गया है। यद्यपि, एनसीआर का प्रथम विद्युतीकृत खंड कानपुर-पनकी (1965) था, जिससे इस क्षेत्र में विद्युत रेल परिचालन की शुरुआत हुई। आज उत्तर मध्य रेलवे भारतीय रेल का एक अग्रणी ज़ोन है, जिसने पूर्ण विद्युतीकरण एवं ऊर्जा दक्षता में ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है।
*पावरकार नहीं, एचओजी से मिल रही कोचों को बिजली*
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर मध्य रेलवे (NCR) ने 142 ट्रेनों के इलेक्ट्रिक इंजनों में हेड आन जेनरेशन (एचओजी) सिस्टम भी स्थापित कर दिया है। एचओजी सिस्टम के माध्यम से कोचों को भी बिजली मिल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में जुलाई 2025 तक 3260 किलो लीटर हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) की बचत हुई है, इससे न केवल रेलवे के राजस्व में बचत हुई है बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी दो हजार टन से अधिक की कमी आई है। जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाकर उत्तर मध्य रेलवे ने भारतीय रेल के 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को गति प्रदान की है।
उत्तर मध्य रेलवे (NCR) ने पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा दक्षता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। आधुनिक तकनीक हेड-ऑन-जनरेशन (HOG) के प्रयोग से यात्री गाड़ियों में पावर कार के लिए डीज़ल की खपत में भारी बचत सुनिश्चित की गई है। अब एलएचबी कोचों की विद्युत आवश्यकताएँ सीधे इलेक्ट्रिक इंजन से ओवरहेड वायर के माध्यम से पूरी होती हैं, जिससे डीज़ल आधारित पावर कारों की आवश्यकता न्यूनतम हो गई है।
इसके साथ ही उत्तर मध्य रेलवे ने कुल 12.7 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र को स्थापित कर वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 118.7 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया है जो कि पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर हमारी निर्भरता मे कमी लाती है साथ ही हमे और अधिक सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को प्रेरित करती है। सौर ऊर्जा द्वारा बिजली के इस उत्पादन से वित्त वर्ष 2024-25 मे रेलवे के राजस्व में 5.34 करोड़ रुपए की बचत हुई तथा कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी करके उत्तर मध्य रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा मे उल्लेखनीय कार्य किया है। इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुये उत्तर मध्य रेलवे 18 मेगावाट के सौर ऊर्जा सयंत्रों को स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रहे है जिससे कि कुल स्थापित सौर क्षमता 30 मेगावाट से भी अधिक हो जाएगी एवं यह कार्य आगामी वर्ष तक पूर्ण कर लिया जाएगा।
उत्तर मध्य रेलवे अपनी सर्विस बिल्डिगों को भी ऊर्जा दक्ष बनाने एवं ऊर्जा दक्षता प्रमाणित करने की दिशा में महत्तवाकांशी कदम उठा रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान 10 सर्विस बिल्डिगों को BEE (ऊर्जा दक्षता ब्यूरो) द्वारा शून्य/शून्य-प्लस प्रमाणपत्र प्रपट कर चुका है एवं इस वर्ष भी 15 और सर्विस बिल्डिगों को प्रमाणपत्र दिलवाने के लिए आवश्यक कदम उठा चुका है।
![]()
