जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान प्रयागराज में धूमधाम से मनाया गया 79वां स्वतंत्रता दिवस

“स्वतंत्रता केवल तिथि नहीं, यह त्याग, तपस्या निष्ठा और संघर्ष का जीवंत प्रतीक है” — राजेन्द्र प्रताप

 

दिव्य भावना के साथ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, प्रयागराज में 79वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति की गूंज के बीच मनाया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8:00 बजे भव्य मार्च-पास्ट और परेड के साथ हुआ, जिसमें प्रशिक्षुओं ने प्राचार्य महोदय को संस्थान के मुख्य द्वार से ध्वजारोहण स्थल तक गरिमापूर्ण ढंग से ले जाया। राष्ट्रगान की गूंज और तिरंगे की लहराती शान ने पूरे परिसर को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।कार्यक्रम मे माननीय बेसिक शिक्षा मंत्री से प्राप्त संदेश का वाचन प्राचार्य सर द्वारा किया । स्कूल महानिदेशक द्वारा प्राप्त संदेश को डॉ. राजेश पांडे ने पढ़ा, वहीं SCERT निदेशक के संदेश का वाचन डॉ. प्रसून सिंह ने किया। समस्त कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता वीरभद्र प्रताप तथा शशांक ने गरिमामय और ऊर्जावान अंदाज़ में किया।

इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आरंभ हुई, जिसमें प्रशिक्षुओं ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति गीत, ओजस्वी कविताएं और प्रेरणादायक भाषण प्रस्तुत किए। प्रत्येक प्रस्तुति ने श्रोताओं के हृदय में देश प्रेम की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। प्राचार्य महोदय सहित सभी सम्मानित अतिथियों का प्रशिक्षुओं ने पुष्पगुच्छ और बैच पहनाकर स्वागत किया गया।प्राचार्य सर ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यक्रम देश प्रेम और राष्ट्र प्रेम की अनेक झलकियों का एक जीवंत स्रोत है। यह भावना केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह हमारे जीवन और कर्म में सदा प्रवाहित रहनी चाहिए।”कार्यक्रम के अंत में प्रवक्ता वीरभद्र प्रताप ने प्रशिक्षुओं के उत्साह, अनुशासन और प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा—स्वतंत्रता दिवस हमें केवल अतीत के बलिदानों की याद नहीं दिलाता, बल्कि हमें भविष्य के निर्माण का संकल्प भी देता है।”इस अवसर पर प्रवक्ता डॉ. विवेक त्रिपाठी, डॉ. राजेश पांडे, डॉ. अमित सिंह, डॉ. प्रसून सिंह, डॉ. अब्दुल मोहई, पंकज यादव, शशांक सिंह, विपिन सिंह, ऋचा राय, निधि मिश्रा, वर्तिका कुशवाहा, सुरभि सिंह तथा अन्य शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी के साथ-साथ 2023 को 2024 बैच के उपस्थित रहे।

डायट प्रयागराज का यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि एक संकल्प था—
“तिरंगे की शान, देश का मान; शिक्षा से होगा भारत महान!

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