अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था आवारा कुत्तों को उठाने में बाधा डालती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने ज़ोर देकर कहा कि शिशुओं और छोटे बच्चों को किसी भी कीमत पर आवारा कुत्तों का शिकार नहीं बनना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने कुत्तों के काटने से रेबीज़ होने की घटनाओं के बारे में एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसमें कहा गया है कि शहर और इसके बाहरी इलाकों में हर दिन सैकड़ों कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे रेबीज फैल रहा है और अंततः बच्चे और बुजुर्ग इस भयानक बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
इस महीने की शुरुआत में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने घोषणा की थी कि वह राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों को उन्नत करेगा और क्षेत्रवार रेबीज विरोधी जागरूकता अभियान चलाएगा। एमसीडी ने एक बयान में कहा कि विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी में संचालित उसके केंद्र जल्द ही कुत्तों में माइक्रोचिप लगाना शुरू करेंगे ताकि नसबंदी की स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज किए जा सकें, जिससे निगरानी और ट्रैकिंग आसान हो सके। नसबंदी के अलावा, इन केंद्रों में रक्त परीक्षण सहित नियमित स्वास्थ्य जांच भी की जाएगी।
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