45 प्रजातियों के रोपण से स्थापित वाटिका के उद्घाटन एवं संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन किया गया

दिनांक 07.07.2025 को भा.वा.अ.शि.प. पारिस्थितिक पुनर्स्थापन केन्द्र की अनुसन्धान पौधशाला, पडिला में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में मियावाकी पद्धति द्वारा लगभग 45 प्रजातियों के रोपण से स्थापित वाटिका के उद्घाटन एवं संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि जैव विविधता विशेषज्ञ, डॉ. विनय रंजन, कार्यालय प्रमुख, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, मध्य क्षेत्रीय केन्द्र, प्रयागराज द्वारा मियावाकी वाटिका के उद्घाटन से किया गया। केन्द्र प्रमुख डॉ. संजय सिंह द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि ने पौधारापित करते हुए मियावाकी पद्धति पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि यह पद्धति जापानी वनस्पति विज्ञानी अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गयी है, इस वृक्षारोपण में स्थानीय जलवायु के अनुसार चयनित देशी प्रजातियों के पौधों को लगाया जाता है, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिले साथ ही प्रदूषण नियंत्रण को भी बढ़ावा मिले।आयोजित कार्यक्रम में केन्द्र प्रमुख डॉ. संजय सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना है बल्कि जनमानस को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना भी है। उन्होने कहा कि नगरी पौधारोपण हेतु मियावाकी पद्धति पर्यावरण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के लिए आदर्श सिद्ध होगा। इसी क्रम में उन्होने वृक्षों के संवर्धन और देख-रेख की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि लगाए गए पौधे सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें। आयोजित कार्यक्रम में वृहद् वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की निगरानी और संरक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गयी। कार्यक्रम समन्वयक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक आलोक यादव ने कहा कि इस पहल से आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं हरा-भरा पर्यावरण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रयागराज केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए ऑकलन के अनुसार नगर वन के रूप में विकसित वन से जैव विविधता में लगभग दो गुना बढ़ोत्तरी आया है। कार्यक्रम में केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारी क्रमशः डॉ. अनीता तोमर, कुमुद दूबे, डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, रतन गुप्ता के साथ धर्मेन्द्र कुमार के साथ बीएसआई के डॉ. ओ.पी. मौर्या, संजय मिश्रा एवं लक्ष्मण कुमार तथा विभिन्न शोधार्थी आदि द्वारा एक-एक पौधा रोपित किया गया।

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