वहीं पत्रकारों से बातचीत में पीड़ित कथा वाचक ने कहा, ”मैं पहले एक निजी स्कूल संचालित करता था लेकिन सरकार ने स्कूल बंद करवा दिया, इसलिए मैं भागवत कथा करने लगा और कथा वाचक मुकुट मणि का सहायक बन गया।’’ उसने कहा, ‘‘हमें 21 जून से दांदरपुर गांव में भागवत कथा के लिए बुलाया गया था। हमसे हमारी जाति पूछी गई। इसके बाद मुझे पूरी रात प्रताड़ित किया गया और मेरे बाल मुंडवा दिए गए।’’ इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ितों के साथ एसएसपी से मिला और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की।
वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि अगर तीन दिनों में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो ‘पीडीए के मान-सम्मान की रक्षा’ के लिए एक बड़े आंदोलन का आह्वान किया जाएगा। आज अखिलेश यादव ने लखनऊ में सपा कार्यालय में इटावा के पीड़ित कथावाचकों का सम्मान किया और उन्हें 21-21 हजार की मदद दी। साथ ही समाजवादी पार्टी की ओर से 51-51 हजार की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गयी। इस दौरान इन कथावाचकों से कथा सुनी गयी और इसके बाद अखिलेश यादव ने सवाल किया कि भागवत कथा सब सुन सकते हैं, तो सब बोल क्यों नहीं सकते?
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