कास्पोरोव 22 साल के थे जब उन्होंने 1985 में अनातोली कार्पोव को हराकर वर्ल्ड खिताब अपने नाम किया था। कास्पारोव ने बुकारेस्ट में सुपरबेट शतरंज क्लासिक के दौरान सेंट लुईस शतरंज क्लब के यूट्यूब चैन से कहा कि, गुकेश आधिकारिक रूप से वर्ल्ड चैंपियन हैं और इसमें कोई शक नहीं है लेकिन हर लिहाज से उससे बेहतर एक और खिलाड़ी भी है।
गुकेश और कार्लसन के बीच ये तुलना पहली बार नहीं हुई है। कास्पारोव ने गुकेश समेत भारत के युवा शतरंज खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए उन्हें विशी के बच्चे करार दिया। पांच बार के वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद उनके समकालीन रहे हैं। कास्पारोव ने कहा कि, गुकेश ने प्रदर्शन में सुधर की काफी गुंजाइश है। वह इसे समझकर इस पर काम कर रहा होगा। कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट जीतने के बाद गुकेश का प्रदर्शन बेहतर हो रहा था।
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