ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि निष्प्रभावी किए गए 31 नक्सलियों में से 28 की पहचान कर ली गई है। ऑपरेशन को ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट नाम दिया गया था और कोबरा, सीआरपीएफ, छत्तीसगढ़ पुलिस की टीमें इस ऑपरेशन में शामिल थीं। इससे पहले किसी भी ऑपरेशन में इतनी बड़ी बरामदगी कभी नहीं हुई। यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। सीआरपीएफ प्रमुख ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान का विवरण भी दिया। इस अभियान के दौरान नक्सली विद्रोहियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 150 से अधिक भूमिगत बंकरों की खोज की गई और उन्हें नष्ट कर दिया गया। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि अभियान केवल युद्ध अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उग्रवाद का समर्थन करने वाले वित्तीय नेटवर्क को भी नष्ट करना शामिल है। उन्होंने कहा, “एक बहुआयामी रणनीति लागू की जा रही है, जिसमें सशस्त्र कैडरों और उनके वित्तपोषण स्रोतों दोनों को लक्षित किया जा रहा है।” यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली व्यापक और निर्णायक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी इसे देश में वामपंथी उग्रवाद को जड़ से खत्म करने के लिए अब तक किए गए सबसे व्यापक और समन्वित प्रयासों में से एक बताते हैं।
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